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नेक्रोपॉलिटिक्स (Necropolitics): अचिल म्बेम्बे

जैव-राजनीति और नेक्रोपॉलिटिक्स में अंतर

नेक्रोपॉलिटिक्स (Necropolitics) समकालीन राजनीतिक सिद्धांत की एक महत्त्वपूर्ण अवधारणा है, जिसके माध्यम से यह समझने का प्रयास किया जाता है कि राज्य, राजनीतिक सत्ता और अन्य प्रभुत्वशाली संस्थाएँ यह कैसे निर्धारित करती हैं कि किसे जीवन जीने का अवसर मिलेगा और किसे मृत्यु, हिंसा तथा असुरक्षा के बीच छोड़ दिया जाएगा। इस अवधारणा का विकास कैमरून के राजनीतिक सिद्धांतकार अचिल म्बेम्बे (Achille Mbembe) ने किया। उनका प्रसिद्ध निबंध Necropolitics वर्ष 2003 में प्रकाशित हुआ था।

नेक्रोपॉलिटिक्स की बौद्धिक पृष्ठभूमि फ्रांसीसी दार्शनिक मिशेल फूको (Michel Foucault) की Biopolitics (जैव-राजनीति) की अवधारणा में मिलती है। फूको ने बताया कि आधुनिक सत्ता केवल कानून और दंड के माध्यम से शासन नहीं करती, बल्कि जनसंख्या के स्वास्थ्य, जन्म, मृत्यु, जीवन-प्रत्याशा और सामाजिक व्यवहार को भी नियंत्रित करती है। म्बेम्बे इस विचार को आगे बढ़ाते हुए सत्ता के उस पक्ष पर ध्यान केंद्रित करते हैं, जिसमें कुछ लोगों को सुरक्षा और जीवन के अवसर प्रदान किए जाते हैं, जबकि कुछ अन्य लोगों को हिंसा, युद्ध, विस्थापन और मृत्यु के निरंतर जोखिम में रखा जाता है।

इस अवधारणा को समझने के लिए उपनिवेशवाद, नस्लवाद, दासता, युद्ध और आधुनिक सुरक्षा-व्यवस्थाओं की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि महत्त्वपूर्ण है। म्बेम्बे के अनुसार, राजनीतिक सत्ता का अध्ययन केवल इस आधार पर नहीं किया जा सकता कि वह जीवन को किस प्रकार व्यवस्थित और संरक्षित करती है; यह भी देखना आवश्यक है कि वह किन लोगों के जीवन को कम महत्त्वपूर्ण मानती है और किन परिस्थितियों में उनकी मृत्यु को स्वीकार्य या सामान्य बना देती है।

अचिल म्बेम्बे (Achille Mbembe): जीवन, विचार एवं राजनीतिक सिद्धांत

अचिल म्बेम्बे (Achille Mbembe) एक प्रसिद्ध कैमरूनी इतिहासकार, राजनीतिक सिद्धांतकार और उत्तर-औपनिवेशिक चिंतक (Postcolonial Thinker) हैं। वे आधुनिक राजनीतिक सत्ता, उपनिवेशवाद, नस्लवाद, संप्रभुता, वैश्वीकरण और मृत्यु की राजनीति के अध्ययन के लिए विशेष रूप से जाने जाते हैं।

म्बेम्बे का प्रमुख योगदान यह समझने में है कि राजनीतिक सत्ता केवल कानून, संस्थाओं और प्रशासन के माध्यम से कार्य नहीं करती, बल्कि यह भी निर्धारित करने में भूमिका निभाती है कि किन समुदायों को सुरक्षा, स्वतंत्रता और सम्मानजनक जीवन प्राप्त होगा तथा किन समुदायों को हिंसा, दमन और मृत्यु के जोखिमों का सामना करना पड़ेगा।

उनकी नेक्रोपॉलिटिक्स (Necropolitics) की अवधारणा समकालीन राजनीतिक सिद्धांत में विशेष महत्त्व रखती है। इसके माध्यम से वे सत्ता और मृत्यु के बीच संबंधों का विश्लेषण करते हैं।

अचिल म्बेम्बे का जन्म 1957 में कैमरून में हुआ था। उन्होंने कैमरून और फ्रांस में शिक्षा प्राप्त की तथा 1989 में पेरिस के सोरबोन विश्वविद्यालय से इतिहास में पीएचडी की। उनके प्रारंभिक शोध में कैमरून के औपनिवेशिक इतिहास, उपनिवेशवाद-विरोधी प्रतिरोध और अफ्रीकी राजनीतिक सत्ता के स्वरूप पर विशेष ध्यान दिया गया।

म्बेम्बे के विचारों को समझने के लिए निम्नलिखित विचारकों और बौद्धिक परंपराओं का अध्ययन उपयोगी है।

  • मिशेल फूको (Michel Foucault): जैव-राजनीति (Biopolitics), जैव-सत्ता (Biopower) और आधुनिक सत्ता के अध्ययन से म्बेम्बे को महत्त्वपूर्ण वैचारिक आधार मिला।
  • फ्रांत्ज़ फैनन (Frantz Fanon): उपनिवेशवाद, नस्लवाद, हिंसा और उपनिवेशित व्यक्ति के अनुभवों का विश्लेषण म्बेम्बे के चिंतन से संबंधित है।
  • उत्तर-औपनिवेशिक चिंतन (Postcolonial Thought): यह परंपरा औपनिवेशिक सत्ता के ऐतिहासिक प्रभावों और स्वतंत्रता के बाद भी बने रहने वाली असमानताओं का अध्ययन करती है।

इन प्रभावों को समझने से स्पष्ट होता है कि म्बेम्बे केवल मृत्यु की राजनीति का अध्ययन नहीं करते, बल्कि उन ऐतिहासिक और सामाजिक संरचनाओं की भी पड़ताल करते हैं जिनके माध्यम से कुछ लोगों पर प्रभुत्व स्थापित किया जाता है।

अचिल म्बेम्बे की प्रमुख पुस्तकें

  1. On the Postcolony (2001)
  2. Critique of Black Reason (2017, अंग्रेज़ी अनुवाद)
  3. Necropolitics (2019)
  4. Out of the Dark Night: Essays on Decolonization (2021, अंग्रेज़ी अनुवाद)

नेक्रोपॉलिटिक्स का अर्थ एवं परिभाषा

नेक्रोपॉलिटिक्स दो शब्दों से मिलकर बना है:

  • नेक्रो (Necro): मृत्यु या मृत अवस्था से संबंधित।
  • पॉलिटिक्स (Politics): राजनीति या सत्ता का संचालन।

इस प्रकार, नेक्रोपॉलिटिक्स का सामान्य अर्थ है मृत्यु की राजनीति, अर्थात् ऐसी राजनीतिक सत्ता-व्यवस्था जिसमें जीवन और मृत्यु के जोखिमों का वितरण राजनीतिक शक्ति, नस्ल, सामाजिक स्थिति, युद्ध और प्रभुत्व के आधार पर होता है।

म्बेम्बे के अनुसार, संप्रभुता (Sovereignty) को समझने का एक महत्त्वपूर्ण आधार यह है कि सत्ता किस प्रकार यह तय करती है कि कौन जीवित रह सकता है और कौन मृत्यु के जोखिम के सामने छोड़ दिया जाता है।

प्रमुख अवधारणाएँ

(क) संप्रभुता और मृत्यु की शक्ति (Sovereignty and Power of Death)

परंपरागत राजनीतिक सिद्धांत में संप्रभुता का संबंध राज्य की सर्वोच्च सत्ता, कानून बनाने और शासन करने की क्षमता से है। म्बेम्बे इस अवधारणा का विस्तार करते हुए बताते हैं कि संप्रभु सत्ता का एक पक्ष लोगों को मारने, उनकी सुरक्षा वापस लेने अथवा उन्हें ऐसी परिस्थितियों में रखने की क्षमता भी है जहाँ उनकी मृत्यु की आशंका लगातार बनी रहती है।

(ख) मृत्यु-जगत (Death-worlds)

Death-worlds नेक्रोपॉलिटिक्स की एक केंद्रीय अवधारणा है। इसका अर्थ ऐसी परिस्थितियों या सामाजिक क्षेत्रों से है जहाँ कुछ समुदायों को लगातार हिंसा, भय, असुरक्षा, विस्थापन और जीवन की बुनियादी सुविधाओं के अभाव में जीना पड़ता है। ऐसे लोग कानूनी रूप से जीवित होते हुए भी सम्मानजनक और सुरक्षित जीवन की संभावनाओं से वंचित हो सकते हैं।

(ग) उपनिवेशवाद और नस्लवाद (Colonialism and Racism)

म्बेम्बे के विचार में उपनिवेशवाद और नस्लवाद ने कुछ लोगों के जीवन को दूसरों की तुलना में कम मूल्यवान मानने वाली सत्ता-व्यवस्थाओं को मजबूत किया। उपनिवेशित समाजों में हिंसा, दमन, जबरन श्रम और अधिकारों से वंचित करने की प्रक्रियाएँ इस दृष्टिकोण को समझने के लिए महत्त्वपूर्ण हैं।

(घ) अपवाद की स्थिति (State of Exception)

जब राज्य सामान्य कानूनी प्रक्रियाओं से हटकर असाधारण शक्तियों का प्रयोग करता है, तब यह प्रश्न महत्त्वपूर्ण हो जाता है कि इन शक्तियों का प्रभाव किन समुदायों पर पड़ता है। यदि सुरक्षा के नाम पर कुछ समूहों को लगातार अधिकारों, संरक्षण और न्याय से वंचित रखा जाता है, तो ऐसी स्थिति का विश्लेषण नेक्रोपॉलिटिक्स के माध्यम से किया जा सकता है।

जैव-राजनीति और नेक्रोपॉलिटिक्स में अंतर

आधारजैव-राजनीति (Biopolitics)नेक्रोपॉलिटिक्स (Necropolitics)
प्रमुख विचारकमिशेल फूकोअचिल म्बेम्बे
मुख्य विषयजीवन का नियमन और जनसंख्या का प्रबंधनमृत्यु की शक्ति और मृत्यु के जोखिमों का वितरण
सत्ता का प्रमुख पक्षजीवन को प्रोत्साहित करना तथा कुछ लोगों को मरने देनाकुछ लोगों को मारना या मृत्यु के जोखिम में छोड़ना
प्रमुख प्रश्नसत्ता जीवन को कैसे नियंत्रित करती है?सत्ता किन लोगों के जीवन को असुरक्षित या त्याज्य बनाती है?
अध्ययन के क्षेत्रस्वास्थ्य, जनसंख्या, जन्म-दर, अनुशासनयुद्ध, उपनिवेशवाद, नस्लीय हिंसा, कब्जा और असुरक्षा

यह अंतर समझने के लिए उपयोगी है, लेकिन दोनों अवधारणाएँ एक-दूसरे से पूरी तरह अलग नहीं हैं। म्बेम्बे का तर्क फूको की जैव-राजनीति से आगे बढ़ता है और दिखाता है कि जीवन के नियमन तथा मृत्यु की शक्ति कई बार साथ-साथ काम करते हैं।

समकालीन राजनीति में प्रासंगिकता

नेक्रोपॉलिटिक्स का उपयोग विभिन्न राजनीतिक परिस्थितियों का विश्लेषण करने में किया जाता है:

  1. युद्ध और सशस्त्र संघर्ष: नागरिक आबादी पर हिंसा, सुरक्षा का अभाव और जीवन के विनाश का अध्ययन।
  2. सीमा एवं प्रवासन राजनीति: प्रवासियों को खतरनाक मार्गों, असुरक्षित परिस्थितियों या अपर्याप्त संरक्षण के सामने छोड़ दिए जाने का विश्लेषण।
  3. नस्लवाद और सामाजिक बहिष्करण: यह समझना कि कुछ समुदायों को व्यवस्थित रूप से कम सुरक्षा और कम अवसर क्यों मिलते हैं।
  4. उपनिवेशवाद और कब्जे की राजनीति: यह अध्ययन करना कि सैन्य नियंत्रण, विस्थापन और अधिकारों का प्रतिबंध लोगों के जीवन को कैसे प्रभावित करते हैं।
  5. राज्य और सुरक्षा: आतंकवाद-विरोधी नीतियों तथा असाधारण शक्तियों के प्रयोग के दौरान मानवाधिकारों और नागरिक सुरक्षा पर पड़ने वाले प्रभावों का विश्लेषण।

इन उदाहरणों में नेक्रोपॉलिटिक्स एक विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण है; किसी विशिष्ट घटना को इस अवधारणा के अंतर्गत रखने के लिए उसके राजनीतिक और ऐतिहासिक संदर्भ का अध्ययन आवश्यक है।

आलोचनात्मक मूल्यांकन

नेक्रोपॉलिटिक्स की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह राजनीति को केवल संस्थाओं, कानूनों और नीतियों के अध्ययन तक सीमित नहीं रखती, बल्कि यह भी पूछती है कि सत्ता के प्रयोग से किन लोगों का जीवन सुरक्षित होता है और किनका जीवन असुरक्षित बनता है।

हालाँकि, इस अवधारणा की आलोचना भी हुई है। कुछ विद्वानों ने प्रश्न उठाया है कि नेक्रोपॉलिटिक्स और फूको की जैव-राजनीति के बीच अंतर को कितना स्पष्ट रूप से निर्धारित किया जा सकता है। इसलिए प्रत्येक प्रकार की हिंसा या असमानता को स्वतः नेक्रोपॉलिटिक्स कहना उचित नहीं होगा; यह देखना आवश्यक है कि सत्ता, मृत्यु, असुरक्षा और सामाजिक बहिष्करण के बीच क्या संबंध है।

निष्कर्ष

नेक्रोपॉलिटिक्स अचिल म्बेम्बे द्वारा विकसित एक महत्त्वपूर्ण राजनीतिक अवधारणा है, जो सत्ता, संप्रभुता, हिंसा और मृत्यु के बीच संबंधों की आलोचनात्मक जाँच करती है। इसका केंद्रीय तर्क यह है कि राजनीतिक सत्ता केवल जीवन का प्रबंधन नहीं करती, बल्कि यह भी प्रभावित करती है कि किन लोगों को सुरक्षा मिलेगी और किन्हें मृत्यु तथा विनाश के जोखिम में छोड़ दिया जाएगा। इस प्रकार, यह अवधारणा आधुनिक राजनीतिक व्यवस्था में असमान सुरक्षा, औपनिवेशिक विरासत, सामाजिक बहिष्करण और मानवाधिकारों के प्रश्नों को समझने का एक महत्त्वपूर्ण सैद्धांतिक आधार प्रदान करती है।


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