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जैक स्नाइडर का सुरक्षा दृष्टिकोण (Jack Snyder’s Approach to Security): संरचनात्मक (Structural), अवधारणात्मक (Perceptional) और साम्राज्यवादी (Imperialist) आयाम

Jack Snyder’s Approach to Security: Structural, Perceptual, and Imperialist Dimensions

 अंतरराष्ट्रीय राजनीति में राज्यों के सुरक्षा संबंधी निर्णयों को समझने के लिए केवल सैन्य शक्ति या शक्ति संतुलन को देखना पर्याप्त नहीं है। किसी राज्य की सुरक्षा नीति इस बात से भी प्रभावित होती है कि अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था कैसी है, राजनीतिक नेतृत्व अन्य राज्यों के इरादों को किस प्रकार समझता है, तथा घरेलू राजनीतिक और आर्थिक हित विदेश नीति को किस प्रकार प्रभावित करते हैं।

जैक स्नाइडर (Jack Snyder) का सुरक्षा संबंधी दृष्टिकोण इसी व्यापक समझ को प्रस्तुत करता है। वे यह तर्क देते हैं कि राज्यों का सुरक्षा व्यवहार केवल शक्ति के वस्तुनिष्ठ वितरण से निर्धारित नहीं होता। सुरक्षा नीति को समझने के लिए संरचनात्मक परिस्थितियों (Structural Conditions), धारणाओं (Perceptions) तथा घरेलू राजनीतिक हितों (Domestic Political Interests) को एक साथ देखना आवश्यक है।

स्नाइडर का दृष्टिकोण यथार्थवाद (Realism) को अधिक व्यापक बनाता है क्योंकि इसमें अंतरराष्ट्रीय संरचना के साथ-साथ राजनीतिक नेतृत्व, अभिजात वर्ग (Political Elites) और घरेलू संस्थाओं की भूमिका को भी महत्व दिया गया है।

सुरक्षा की मूल समस्या

  • अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था अराजकतापूर्ण (Anarchy) होती है क्योंकि वहाँ कोई सर्वोच्च वैश्विक प्राधिकरण (Supreme Authority) नहीं होता जो सभी राज्यों की सुरक्षा सुनिश्चित कर सके। परिणामस्वरूप प्रत्येक राज्य को अपनी सुरक्षा स्वयं सुनिश्चित करनी पड़ती है।
  • समस्या यह है कि जब कोई राज्य अपनी सुरक्षा बढ़ाने के लिए सैन्य क्षमता विकसित करता है, तो अन्य राज्य उसे संभावित खतरे के रूप में देख सकते हैं। इसके उत्तर में वे भी अपनी सैन्य शक्ति बढ़ाने लगते हैं। इस प्रकार सुरक्षा प्रतिस्पर्धा (Security Competition) का एक चक्र प्रारंभ हो जाता है।
  • स्नाइडर के अनुसार इस प्रक्रिया को समझने के लिए केवल वास्तविक सैन्य क्षमता को देखना पर्याप्त नहीं है। यह भी समझना आवश्यक है कि राजनीतिक नेतृत्व उन क्षमताओं और इरादों की व्याख्या किस प्रकार करता है।

सुरक्षा का संरचनात्मक आयाम (Structural Dimension)

  • स्नाइडर के सुरक्षा विश्लेषण का पहला महत्वपूर्ण आयाम संरचनात्मक (Structural) है।
  • इस दृष्टिकोण में अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था की संरचना को विशेष महत्व दिया जाता है। इसमें शक्ति वितरण (Power Distribution), ध्रुवीयता (Polarity), गठबंधन (Alliances), रणनीतिक वातावरण (Strategic Environment) तथा राज्यों की सापेक्ष क्षमताएँ (Relative Capabilities) शामिल होती हैं।
  • यदि अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था में शक्ति का वितरण असंतुलित हो, तो राज्यों की सुरक्षा संबंधी चिंताएँ बढ़ सकती हैं। कोई उभरती हुई शक्ति (Rising Power) अन्य राज्यों के लिए संभावित खतरा बन सकती है, जिसके परिणामस्वरूप संतुलनकारी व्यवहार (Balancing Behaviour), हथियारों की दौड़ (Arms Race) तथा नए गठबंधनों का निर्माण हो सकता है।
  • इस प्रकार संरचनात्मक आयाम यह बताता है कि अंतरराष्ट्रीय वातावरण राज्यों के विकल्पों को किस प्रकार सीमित या प्रभावित करता है।

किन्तु स्नाइडर के अनुसार संरचना पूरी कहानी नहीं बताती। समान संरचनात्मक परिस्थितियों में भी विभिन्न राज्य अलग-अलग सुरक्षा नीतियाँ अपना सकते हैं। इसका कारण धारणाओं और घरेलू राजनीतिक प्रक्रियाओं में निहित होता है।

सुरक्षा का अवधारणात्मक आयाम (Perceptional Dimension)

  • सुरक्षा का दूसरा महत्वपूर्ण आयाम अवधारणात्मक (Perceptional) है।
  • किसी राज्य के लिए खतरा केवल दूसरे राज्य की वास्तविक सैन्य क्षमता से निर्धारित नहीं होता। यह इस बात पर भी निर्भर करता है कि वह राज्य दूसरे राज्य की क्षमताओं और इरादों को किस प्रकार समझता है।
  • यदि किसी राज्य को यह विश्वास हो जाए कि दूसरा राज्य शत्रुतापूर्ण इरादे रखता है, तो वह अपेक्षाकृत सीमित सैन्य क्षमता को भी गंभीर खतरे के रूप में देख सकता है।
  • इसके विपरीत यदि दो राज्यों के बीच विश्वास और सहयोग का स्तर अधिक हो, तो समान सैन्य क्षमता उतनी खतरनाक प्रतीत नहीं होगी।

इसलिए सुरक्षा अध्ययन में एक महत्वपूर्ण अंतर है:

वस्तुनिष्ठ क्षमता (Objective Capability) अनुभूत खतरा (Perceived Threat)

स्नाइडर के अनुसार राजनीतिक नेता और अभिजात वर्ग खतरों की व्याख्या करते हैं, और यही व्याख्या विदेश नीति के निर्णयों को प्रभावित करती है।

खतरे की धारणा के स्रोत

आधारप्रभाव
सैन्य क्षमतावास्तविक शक्ति का आकलन
राजनीतिक इरादामित्र या शत्रु की पहचान
ऐतिहासिक अनुभवविश्वास या अविश्वास का निर्माण
नेतृत्व की सोचविदेश नीति की दिशा निर्धारित

यदि दो राज्यों के बीच विश्वास अधिक हो, तो समान सैन्य क्षमता भी कम खतरनाक प्रतीत हो सकती है। वहीं अविश्वास की स्थिति में छोटी सैन्य शक्ति भी बड़े खतरे के रूप में दिखाई दे सकती है।

गलत धारणा (Misperception) और सुरक्षा दुविधा (Security Dilemma)

  • अवधारणात्मक आयाम का सबसे महत्वपूर्ण परिणाम गलत धारणा (Misperception) हो सकता है।
  • यदि एक राज्य की रक्षात्मक नीति (Defensive Policy) को दूसरा राज्य आक्रामक नीति (Offensive Policy) के रूप में देखता है, तो सुरक्षा दुविधा (Security Dilemma) उत्पन्न हो जाती है।
  • उदाहरण के लिए यदि राज्य A अपनी सुरक्षा के लिए सैन्य आधुनिकीकरण करता है, तो राज्य B इसे विस्तारवादी नीति समझ सकता है। इसके उत्तर में राज्य B अपनी सैन्य शक्ति बढ़ाता है। राज्य A फिर राज्य B की बढ़ती सैन्य क्षमता को खतरे के रूप में देखता है और अपनी सैन्य तैयारी और अधिक बढ़ा देता है।

  • इस प्रक्रिया में दोनों राज्य स्वयं को रक्षात्मक मान सकते हैं, लेकिन उनकी पारस्परिक धारणाएँ संघर्ष और अविश्वास को बढ़ाती रहती हैं।
  • इसी कारण स्नाइडर सुरक्षा को केवल सैन्य क्षमताओं के आधार पर नहीं बल्कि क्षमताओं, धारणाओं और उनकी व्याख्याओं के संयुक्त प्रभाव के रूप में समझते हैं।

सुरक्षा का साम्राज्यवादी आयाम (Imperialist Dimension)

स्नाइडर के विचारों में सुरक्षा का तीसरा महत्वपूर्ण आयाम साम्राज्यवादी (Imperialist) है।

  • यह दृष्टिकोण बताता है कि कई बार राज्यों की विदेश नीति केवल वास्तविक सुरक्षा आवश्यकताओं से निर्धारित नहीं होती। घरेलू राजनीतिक अभिजात वर्ग, सैन्य प्रतिष्ठान, आर्थिक हित समूह तथा विस्तारवादी प्रवृत्तियाँ भी सुरक्षा नीति को प्रभावित कर सकती हैं।
  • कभी-कभी राजनीतिक नेतृत्व अपने हितों को उचित ठहराने के लिए बाहरी खतरे को वास्तविकता से अधिक गंभीर रूप में प्रस्तुत करता है।
  • ऐसी स्थिति में सुरक्षा नीति का उद्देश्य केवल राष्ट्रीय अस्तित्व (National Survival) नहीं रह जाता, बल्कि प्रभाव विस्तार (Influence Expansion), क्षेत्रीय विस्तार (Territorial Expansion), रणनीतिक पहुँच (Strategic Access) तथा अभिजात हितों (Elite Interests) की पूर्ति भी बन सकता है।

इसलिए साम्राज्यवादी आयाम यह महत्वपूर्ण प्रश्न उठाता है:

सुरक्षा नीति से वास्तव में लाभ किसे हो रहा है, और इसके पीछे किन हितों की भूमिका है?

साम्राज्यवादी अतिविस्तार (Imperial Overexpansion)

  • जैक स्नाइडर का एक महत्वपूर्ण योगदान यह है कि उन्होंने यह स्पष्ट किया कि महाशक्तियाँ (Great Powers) कई बार अपनी वास्तविक सुरक्षा आवश्यकताओं से आगे बढ़कर विस्तारवादी नीतियाँ अपनाती हैं।
  • जब घरेलू राजनीतिक संस्थाएँ कमजोर होती हैं और प्रभावशाली हित समूह विदेश नीति पर अत्यधिक प्रभाव डालते हैं, तब विस्तारवादी नीतियों को राष्ट्रीय सुरक्षा के नाम पर वैध ठहराया जा सकता है।
  • किन्तु अत्यधिक विस्तार अंततः सुरक्षा को मजबूत करने के बजाय कमजोर कर सकता है। राज्य अपने संसाधनों को अनेक रणनीतिक प्रतिबद्धताओं में खर्च कर देता है तथा एक साथ कई संघर्षों में उलझ सकता है।
  • इसे साम्राज्यवादी अतिविस्तार (Imperial Overexpansion) या साम्राज्यवादी अति-विस्तार (Imperial Overstretch) कहा जाता है।
  • इस प्रकार जो नीति प्रारंभ में सुरक्षा बढ़ाने के लिए अपनाई जाती है, वही बाद में असुरक्षा का कारण बन सकती है।

तीनों आयामों का परस्पर संबंध

  • स्नाइडर के सुरक्षा दृष्टिकोण को तीन अलग-अलग भागों के रूप में नहीं बल्कि एक परस्पर संबद्ध ढाँचे (Integrated Framework) के रूप में समझना चाहिए।
  • सबसे पहले अंतरराष्ट्रीय संरचना राज्यों को एक विशिष्ट रणनीतिक वातावरण प्रदान करती है।
  • इसके बाद राजनीतिक नेतृत्व और अभिजात वर्ग उस वातावरण की अपनी धारणाओं के आधार पर व्याख्या करते हैं।
  • अंततः घरेलू राजनीतिक और आर्थिक हित यह निर्धारित करते हैं कि सुरक्षा खतरों को कैसे परिभाषित किया जाए और कौन-सी विदेश नीति अपनाई जाए।

इस प्रक्रिया को निम्न प्रकार समझा जा सकता है:

हालाँकि यह संबंध हमेशा सीधा नहीं होता। कई बार घरेलू हित स्वयं खतरे की धारणाओं को प्रभावित करते हैं और खतरे की धारणाएँ अंतरराष्ट्रीय संरचना की व्याख्या को बदल देती हैं।

यथार्थवाद के साथ संबंध

  • स्नाइडर का दृष्टिकोण यथार्थवाद से पूरी तरह अलग नहीं है। वे शक्ति, सुरक्षा प्रतिस्पर्धा और अंतरराष्ट्रीय संरचना के महत्व को स्वीकार करते हैं।
  • किन्तु वे केवल संरचनात्मक व्याख्या तक सीमित नहीं रहते।
  • केनेथ वॉल्ट्ज (Kenneth Waltz) के संरचनात्मक यथार्थवाद (Structural Realism) में शक्ति वितरण और अंतरराष्ट्रीय संरचना प्रमुख व्याख्यात्मक कारक हैं। इसके विपरीत स्नाइडर इन तत्वों के साथ घरेलू राजनीति, अभिजात हितों और धारणाओं को भी शामिल करते हैं।
  • यही कारण है कि उनका दृष्टिकोण यह समझाने में सक्षम है कि समान अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों में विभिन्न राज्य अलग-अलग सुरक्षा नीतियाँ क्यों अपनाते हैं।

केनेथ वॉल्ट्ज और जैक स्नाइडर में अंतर

आधारकेनेथ वॉल्ट्जजैक स्नाइडर
मुख्य कारणअंतरराष्ट्रीय संरचनासंरचना, धारणा और घरेलू राजनीति
विश्लेषण का स्तरप्रणाली स्तरप्रणाली और राज्य दोनों
खतरे का आधारशक्ति वितरणशक्ति और उसकी राजनीतिक व्याख्या
विदेश नीतिसंरचना से प्रभावितनेतृत्व और संस्थाओं से भी प्रभावित

इस प्रकार स्नाइडर का दृष्टिकोण संरचनात्मक यथार्थवाद (Structural Realism) को अधिक व्यवहारिक और राज्य केंद्रित बनाता है।

समकालीन प्रासंगिकता

  • वर्तमान अंतरराष्ट्रीय राजनीति में स्नाइडर का दृष्टिकोण अत्यंत प्रासंगिक है।
  • आज महाशक्ति प्रतिस्पर्धा (Great Power Competition), सैन्य आधुनिकीकरण (Military Modernisation), तकनीकी प्रतिस्पर्धा (Technological Competition) तथा रणनीतिक साझेदारियाँ (Strategic Partnerships) वैश्विक राजनीति को प्रभावित कर रही हैं।
  • एक राज्य किसी कदम को रक्षात्मक उपाय मान सकता है, जबकि दूसरा राज्य उसे आक्रामक तैयारी के रूप में देख सकता है।
  • इसी प्रकार रक्षा उद्योग (Defence Industry), सैन्य प्रतिष्ठान (Military Establishment), राजनीतिक नेतृत्व और रणनीतिक समुदाय (Strategic Community) विदेश नीति की दिशा को प्रभावित कर सकते हैं।
  • इसलिए समकालीन सुरक्षा विश्लेषण में केवल यह पूछना पर्याप्त नहीं है कि खतरा कितना वास्तविक है, बल्कि यह भी आवश्यक है कि खतरे को किस प्रकार समझा और राजनीतिक रूप से निर्मित किया जा रहा है।

निष्कर्ष

जैक स्नाइडर का सुरक्षा दृष्टिकोण यह स्पष्ट करता है कि अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा को केवल सैन्य शक्ति और शक्ति वितरण के आधार पर नहीं समझा जा सकता।

संरचनात्मक आयाम यह बताता है कि अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था और शक्ति संतुलन राज्यों के सुरक्षा विकल्पों को कैसे प्रभावित करते हैं।

अवधारणात्मक आयाम यह दर्शाता है कि वास्तविकता से अधिक महत्वपूर्ण कई बार यह हो सकता है कि राजनीतिक नेतृत्व खतरों और इरादों को किस प्रकार समझता है। गलत धारणाएँ सुरक्षा दुविधा और हथियारों की दौड़ को जन्म दे सकती हैं।

साम्राज्यवादी आयाम यह प्रश्न उठाता है कि सुरक्षा नीतियों के पीछे घरेलू अभिजात वर्ग, सैन्य प्रतिष्ठान और विस्तारवादी हित किस प्रकार कार्य करते हैं। कई बार अत्यधिक विस्तार सुरक्षा को मजबूत करने के बजाय असुरक्षा और रणनीतिक बोझ उत्पन्न कर देता है।

इस प्रकार जैक स्नाइडर का दृष्टिकोण सुरक्षा अध्ययन को अधिक व्यापक, यथार्थवादी तथा घरेलू राजनीति और धारणाओं के प्रति संवेदनशील बनाता है।


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