लोकतांत्रिक अभिजनवाद (Democratic Elitism) लोकतंत्र और अभिजन सिद्धांत (Elite Theory) के बीच संबंध को समझाने वाला एक महत्वपूर्ण दृष्टिकोण है। इसके अनुसार लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनता को मतदान, चुनाव और राजनीतिक भागीदारी का अवसर तो प्राप्त होता है, लेकिन वास्तविक राजनीतिक निर्णय-निर्माण (Decision-Making) प्रायः समाज के अपेक्षाकृत छोटे और प्रभावशाली अभिजन समूह (Elite Group) के हाथों में केंद्रित रहता है। इसलिए लोकतंत्र का अर्थ हमेशा यह नहीं होता कि जनता स्वयं प्रत्यक्ष रूप से शासन करती है; बल्कि लोकतंत्र ऐसी व्यवस्था हो सकती है जिसमें जनता विभिन्न अभिजन समूहों में से अपने प्रतिनिधियों और नेताओं का चुनाव करती है।
लोकतांत्रिक अभिजनवाद लोकतांत्रिक व्यवस्था के एक महत्वपूर्ण विरोधाभास को सामने रखता है, एक ओर लोकतंत्र जनसत्ता (Popular Sovereignty) और जनभागीदारी (Mass Participation) पर आधारित होने का दावा करता है, जबकि दूसरी ओर राजनीतिक सत्ता और नीति-निर्माण (Policy Formulation) पर कुछ प्रभावशाली व्यक्तियों, समूहों और संस्थाओं का असमान प्रभाव बना रह सकता है। स्रोत सामग्री के अनुसार, अभिजन राजनीतिक निर्णयों को प्रभावित करते हैं और कई परिस्थितियों में उनकी प्राथमिकताएँ सामान्य जनता के हितों पर प्रभाव डाल सकती हैं।
लोकतांत्रिक अभिजनवाद की मूल धारणा
- लोकतांत्रिक अभिजनवाद का केंद्रीय तर्क यह है कि आधुनिक बड़े और जटिल समाजों में प्रत्येक नागरिक का प्रत्येक राजनीतिक निर्णय में प्रत्यक्ष भाग लेना व्यावहारिक नहीं है। इसलिए जनता प्रतिनिधियों का चुनाव करती है और ये प्रतिनिधि शासन तथा नीति-निर्माण का कार्य करते हैं। इस प्रक्रिया में राजनीतिक नेतृत्व, प्रशासनिक विशेषज्ञता, आर्थिक संसाधन, शिक्षा, संगठनात्मक क्षमता और संस्थागत पहुँच रखने वाले लोग अधिक प्रभावशाली बन सकते हैं।
- इस प्रकार लोकतंत्र में जनता की भूमिका मुख्यतः नेताओं के चयन और उन्हें बदलने की क्षमता में दिखाई देती है। जनता चुनाव के माध्यम से राजनीतिक अभिजन (Political Elite) को चुन सकती है, लेकिन चुनावों के बीच शासन का दैनिक संचालन मुख्यतः चुने हुए नेताओं तथा राजनीतिक संस्थाओं के हाथों में रहता है।
प्रमुख विचारक
- जोसेफ शुम्पीटर (Joseph Schumpeter)
- लोकतांत्रिक अभिजनवाद को समझने में जोसेफ शुम्पीटर का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने लोकतंत्र को मुख्यतः प्रतिस्पर्धात्मक अभिजन मॉडल (Competitive Elite Model) के रूप में देखा।
- शुम्पीटर के अनुसार लोकतंत्र का अर्थ यह नहीं है कि जनता स्वयं प्रत्येक राजनीतिक निर्णय लेती है। लोकतंत्र एक ऐसी संस्थागत पद्धति है जिसमें विभिन्न राजनीतिक नेता जनता के मत प्राप्त करने के लिए प्रतिस्पर्धा करते हैं। जनता चुनाव के माध्यम से इन नेताओं में से अपना नेतृत्व चुनती है।
- इस दृष्टिकोण में चुनाव (Election) लोकतंत्र का केंद्रीय तंत्र बन जाता है। जनता नेताओं को चुनती है और आवश्यकता पड़ने पर उन्हें सत्ता से बाहर भी कर सकती है। इस प्रकार लोकतांत्रिक नियंत्रण मुख्यतः राजनीतिक नेतृत्व के चयन और उसके प्रतिस्थापन (Replacement) में दिखाई देता है।
- विल्फ्रेडो पेरेटो (Vilfredo Pareto)
- पेरेटो ने अभिजनों का परिसंचरण (Circulation of Elites) की अवधारणा प्रस्तुत की। उनके अनुसार किसी भी समाज में अभिजन वर्ग की भूमिका समाप्त नहीं होती। समय के साथ एक अभिजन समूह कमजोर हो सकता है और उसके स्थान पर दूसरा अभिजन समूह आ सकता है।
- इस प्रकार सत्ता में परिवर्तन का अर्थ आवश्यक रूप से अभिजन शासन का अंत नहीं होता। बल्कि एक अभिजन समूह के स्थान पर दूसरे अभिजन समूह का आगमन हो सकता है। इसलिए पेरेटो का विचार यह समझने में उपयोगी है कि राजनीतिक परिवर्तन और अभिजन नियंत्रण एक-दूसरे के विरोधी नहीं हैं।
- रॉबर्ट माइकेल्स (Robert Michels)
- रॉबर्ट माइकेल्स ने अल्पतंत्र का लौह नियम (Iron Law of Oligarchy) प्रस्तुत किया। उनका तर्क था कि बड़े संगठन, चाहे वे प्रारंभ में कितने भी लोकतांत्रिक उद्देश्यों के साथ स्थापित किए गए हों, समय के साथ कुछ नेताओं और पदाधिकारियों के नियंत्रण में जाने की प्रवृत्ति रखते हैं।
- संगठन के आकार में वृद्धि, विशेषज्ञता की आवश्यकता, नेतृत्व का केंद्रीकरण और संगठनात्मक कार्यों की जटिलता कुछ लोगों को विशेष शक्ति प्रदान कर सकती है। परिणामस्वरूप संगठन में औपचारिक लोकतांत्रिक संरचना मौजूद रहने के बावजूद वास्तविक निर्णय-निर्माण सीमित नेतृत्व के हाथों में केंद्रित हो सकता है।
लोकतांत्रिक अभिजनवाद की प्रमुख अवधारणाएँ
अभिजन सिद्धांत (Elite Theory)
- अभिजन सिद्धांत इस बात पर केंद्रित है कि समाज में राजनीतिक निर्णयों को प्रभावित करने की क्षमता समान रूप से वितरित नहीं होती। कुछ व्यक्ति या समूह अपनी संपत्ति, शिक्षा, संगठनात्मक क्षमता, राजनीतिक संपर्क या संस्थागत स्थिति के कारण दूसरों की तुलना में अधिक प्रभाव रखते हैं।
राजनीतिक अभिजन (Political Elites)
- राजनीतिक अभिजन वे व्यक्ति या समूह हैं जो राजनीतिक सत्ता और निर्णय-निर्माण को प्रभावित करने की अपेक्षाकृत अधिक क्षमता रखते हैं। इनमें राजनीतिक नेता, उच्च प्रशासनिक अधिकारी तथा प्रभावशाली राजनीतिक नेटवर्क शामिल हो सकते हैं।
जनभागीदारी (Mass Participation)
- लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनता मतदान और अन्य राजनीतिक गतिविधियों के माध्यम से भाग लेती है। लेकिन लोकतांत्रिक अभिजनवाद इस बात पर जोर देता है कि जनभागीदारी और वास्तविक निर्णय-निर्माण में अंतर हो सकता है। जनता व्यापक स्तर पर राजनीतिक प्रक्रिया में भाग ले सकती है, जबकि अंतिम नीति-निर्णय सीमित राजनीतिक अभिजन द्वारा किए जा सकते हैं।
लोकतांत्रिक अभिजनवाद की प्रमुख विशेषताएँ
- नेताओं का चयन (Selection of Leaders):
लोकतांत्रिक व्यवस्था में नागरिक चुनावों के माध्यम से नेताओं का चयन करते हैं। लोकतांत्रिक अभिजनवादी दृष्टिकोण में चुनाव राजनीतिक नेतृत्व के चयन की प्रतिस्पर्धात्मक प्रक्रिया है। - नीति–निर्माण पर अभिजन प्रभाव (Elite Influence on Policy):
नीतियों के निर्माण और कार्यान्वयन पर राजनीतिक, आर्थिक तथा संस्थागत रूप से प्रभावशाली समूहों का अधिक प्रभाव हो सकता है। - जनमत का निर्माण (Shaping Public Opinion):
अभिजन केवल सरकारी संस्थाओं के माध्यम से ही नहीं बल्कि मीडिया, राजनीतिक विमर्श और सार्वजनिक बहस के माध्यम से भी जनमत को प्रभावित कर सकते हैं। - सत्ता का असमान वितरण (Unequal Distribution of Power):
लोकतंत्र में राजनीतिक अधिकार औपचारिक रूप से समान हो सकते हैं, लेकिन राजनीतिक संसाधनों तक पहुँच समान नहीं होती। यही असमानता अभिजन प्रभाव को जन्म देती है।

अभिजन सत्ता बनाए रखने के प्रमुख तंत्र
संस्थागत संरचनाएँ (Institutional Structures): राजनीतिक संस्थाओं की संरचना कुछ समूहों को दूसरों की तुलना में अधिक प्रभाव प्रदान कर सकती है। चुनावी वित्तपोषण (Campaign Financing), राजनीतिक संस्थाओं तक पहुँच और निर्णय-निर्माण की प्रक्रियाएँ अभिजन प्रभाव को बढ़ा सकती हैं।
सामाजिक स्तरीकरण (Social Stratification): धन, शिक्षा, सामाजिक स्थिति और संसाधनों की असमानता राजनीतिक अवसरों को भी प्रभावित करती है। जिन समूहों के पास अधिक संसाधन होते हैं, वे राजनीतिक प्रक्रिया में अधिक प्रभावी ढंग से भाग ले सकते हैं।
राजनीतिक दल (Political Parties): राजनीतिक दल लोकतंत्र में जनप्रतिनिधित्व का महत्वपूर्ण माध्यम हैं, लेकिन दलों के भीतर भी नेतृत्व का केंद्रीकरण हो सकता है। परिणामस्वरूप व्यापक सदस्यता होने के बावजूद निर्णय कुछ प्रभावशाली नेताओं के हाथों में केंद्रित हो सकते हैं।
लोकतांत्रिक अभिजनवाद की आलोचनाएँ
- लोकतांत्रिक घाटा (Democratic Deficit): यदि वास्तविक निर्णय-निर्माण कुछ अभिजन समूहों तक सीमित हो जाए, तो लोकतंत्र के जनसहभागिता और जनसत्ता संबंधी आदर्श कमजोर हो सकते हैं।
- असमानता की समस्या: अभिजन समूहों के पास आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक संसाधनों का अधिक संकेंद्रण होने से राजनीतिक असमानता बढ़ सकती है। इससे लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व में असंतुलन उत्पन्न हो सकता है।
- मतदाता उदासीनता (Voter Disengagement): यदि नागरिकों को यह अनुभव होने लगे कि उनके मतदान के बावजूद वास्तविक राजनीतिक निर्णय प्रभावशाली अभिजन समूहों द्वारा ही लिए जाते हैं, तो राजनीतिक उदासीनता (Political Apathy) और मतदाता निष्क्रियता बढ़ सकती है।
- लोकतांत्रिक आदर्शों के साथ तनाव: लोकतंत्र का आदर्श नागरिकों की समान राजनीतिक भागीदारी पर जोर देता है, जबकि लोकतांत्रिक अभिजनवाद वास्तविक राजनीतिक प्रक्रिया में शक्ति के असमान वितरण को रेखांकित करता है। यही दोनों के बीच मूल तनाव है।
लोकतांत्रिक अभिजनवाद और अन्य दृष्टिकोण
लोकतांत्रिक अभिजनवाद बनाम बहुलवाद (Pluralism): बहुलवाद के अनुसार राजनीतिक शक्ति अनेक प्रतिस्पर्धी समूहों में वितरित रहती है। विभिन्न हित समूह नीति-निर्माण को प्रभावित करते हैं। इसके विपरीत लोकतांत्रिक अभिजनवाद इस बात पर अधिक जोर देता है कि राजनीतिक प्रक्रिया में कुछ अपेक्षाकृत सीमित अभिजन समूह अधिक प्रभावशाली बने रहते हैं।
लोकतांत्रिक अभिजनवाद बनाम सहभागी लोकतंत्र (Participatory Democracy): सहभागी लोकतंत्र नागरिकों की व्यापक और निरंतर राजनीतिक भागीदारी का समर्थन करता है। इसके विपरीत लोकतांत्रिक अभिजनवाद आधुनिक लोकतंत्र की व्यावहारिक सीमाओं और विशेषज्ञ नेतृत्व की आवश्यकता पर अधिक ध्यान देता है।
लोकतांत्रिक अभिजनवाद और लोकलुभावनवाद (Populism): लोकलुभावनवाद अक्सर स्वयं को राजनीतिक अभिजन के विरुद्ध सामान्य जनता की राजनीति के रूप में प्रस्तुत करता है। इसलिए अभिजन-विरोध (Anti-Elitism) लोकलुभावन राजनीति की एक महत्वपूर्ण विशेषता बन सकता है।
निष्कर्ष
लोकतांत्रिक अभिजनवाद लोकतंत्र की एक यथार्थवादी व्याख्या प्रस्तुत करता है। यह बताता है कि लोकतांत्रिक संस्थाओं में चुनाव, जनभागीदारी और प्रतिनिधित्व मौजूद होने के बावजूद राजनीतिक शक्ति समान रूप से वितरित नहीं होती। कुछ राजनीतिक, आर्थिक और संस्थागत रूप से प्रभावशाली समूह नीति-निर्माण और जनमत पर अधिक प्रभाव डाल सकते हैं।
इस दृष्टिकोण का महत्व इस बात में है कि यह लोकतंत्र के औपचारिक स्वरूप के साथ-साथ उसकी वास्तविक शक्ति-संरचना को समझने का प्रयास करता है। शुम्पीटर ने चुनावी प्रतिस्पर्धा को लोकतंत्र का केंद्रीय तंत्र माना, पेरेटो ने अभिजनों के परिसंचरण को समझाया और माइकेल्स ने संगठनात्मक स्तर पर अल्पतंत्रीकरण की प्रवृत्ति को स्पष्ट किया। इस प्रकार लोकतांत्रिक अभिजनवाद लोकतंत्र के भीतर जनभागीदारी और अभिजन नियंत्रण, दोनों को समझने का एक महत्वपूर्ण विश्लेषणात्मक ढाँचा प्रदान करता है।
MCQ
- जोसेफ शुम्पीटर के अनुसार लोकतंत्र का मुख्य कार्य क्या है?
(a) जनता द्वारा प्रत्यक्ष शासन
(b) चुनावों के माध्यम से नेतृत्व का चयन
(c) वर्गविहीन समाज की स्थापना
(d) राज्य का उन्मूलन
उत्तर: (b) चुनावों के माध्यम से नेतृत्व का चयन
- विल्फ्रेडो पेरेटो की ‘अभिजनों का परिसंचरण’ (Circulation of Elites) अवधारणा का क्या अर्थ है?
(a) अभिजन वर्ग का पूर्ण अंत
(b) जनता द्वारा प्रत्यक्ष शासन
(c) एक अभिजन समूह का दूसरे अभिजन समूह द्वारा प्रतिस्थापन
(d) राजनीतिक दलों का अंत
उत्तर: (c) एक अभिजन समूह का दूसरे अभिजन समूह द्वारा प्रतिस्थापन
- रॉबर्ट माइकेल्स का ‘अल्पतंत्र का लौह नियम’ (Iron Law of Oligarchy) मुख्यतः किस बात को दर्शाता है?
(a) संगठनों में नेतृत्व के केंद्रीकरण की प्रवृत्ति
(b) जनता की पूर्ण राजनीतिक समानता
(c) आर्थिक समानता की स्थापना
(d) राज्य की शक्ति का अंत
उत्तर: (a) संगठनों में नेतृत्व के केंद्रीकरण की प्रवृत्ति
- लोकतांत्रिक अभिजनवाद की प्रमुख विशेषता क्या है?
(a) सभी नागरिकों द्वारा प्रत्यक्ष नीति-निर्माण
(b) राजनीतिक शक्ति का पूर्ण विकेंद्रीकरण
(c) जनभागीदारी के बावजूद राजनीतिक निर्णयों पर अभिजन समूहों का प्रभाव
(d) राजनीतिक दलों का समाप्त हो जाना
उत्तर: (c) जनभागीदारी के बावजूद राजनीतिक निर्णयों पर अभिजन समूहों का प्रभाव
- लोकतांत्रिक अभिजनवाद की तुलना में बहुलवाद (Pluralism) किस बात पर अधिक जोर देता है?
(a) एक ही अभिजन समूह के प्रभुत्व पर
(b) अनेक प्रतिस्पर्धी हित-समूहों के बीच शक्ति के वितरण पर
(c) सेना के शासन पर
(d) जनता की राजनीतिक निष्क्रियता पर
उत्तर: (b) अनेक प्रतिस्पर्धी हित–समूहों के बीच शक्ति के वितरण पर
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