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तेलुगु गंगा, आपातकाल और भारतीय संघवाद का निर्माणकारी क्षण

Telugu Ganga, Emergency and the Formative Moment of Indian Federalism- Indian Express

भारतीय संविधान में संघवाद (Federalism) का अर्थ है कि केंद्र और राज्यों के बीच शक्तियों का संवैधानिक विभाजन हो। लेकिन व्यवहार में यह संबंध केवल संविधान से नहीं, बल्कि राजनीतिक परिस्थितियों, संसाधनों के नियंत्रण, क्षेत्रीय दलों और राष्ट्रीय हितों से भी प्रभावित होता है।

  • तेलुगु गंगा परियोजना इसका सर्वोत्तम उदाहरण है। यह परियोजना दिखाती है कि किस प्रकार जल संसाधन, राजनीति और संघवाद एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं।
  • राजनीतिक वैज्ञानिक श्रीनिवास चोक्काकुला का मत है कि तेलुगु गंगा परियोजना केवल एक विकास परियोजना नहीं थी; यह भारतीय संघवाद के विकास का एक ऐसा ऐतिहासिक क्षण (Formative Federal Moment) थी, जिसने केंद्र-राज्य संबंधों, अंतर्राज्यीय नदी जल राजनीति तथा सहकारी संघवाद की प्रकृति को नई दिशा प्रदान की।
  • लेखक श्रीनिवास चोक्काकुला का मुख्य तर्क है कि तेलुगु गंगा परियोजना केवल पानी पहुँचाने की योजना नहीं थी, बल्कि इसने भारतीय संघवाद के विकास को नई दिशा दी।

तेलुगु गंगा परियोजना क्या है?

  • यह एक अंतर्राज्यीय नदी जल साझा (Inter-State River Water Sharing) परियोजना है।
  • इसका उद्देश्य था, कृष्णा नदी का पानी आंध्र प्रदेश के माध्यम से चेन्नई (मद्रास) तक पहुँचाना, ताकि शहर की पेयजल समस्या का समाधान किया जा सके।
  • यह समझौता वर्ष 1976 प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के समयकाल में आपातकाल (1975-77) के दौरान हुआ।

इसमें कौनकौन से राज्य शामिल थे?

(1) आंध्र प्रदेश: मुख्य नहरें इसी राज्य से गुजरती थीं।

(2) कर्नाटक: कृष्णा नदी का ऊपरी प्रवाह।

(3) महाराष्ट्र: कृष्णा नदी का ऊपरी बेसिन।

(4) तमिलनाडु: जल का अंतिम लाभार्थी राज्य।

समझौता 1976 में ही क्यों हुआ?

  • वास्तव में यह समझौता 1975-77 के आपातकाल के दौरान उस समय संभव हुआ जब केंद्र सरकार के पास असाधारण राजनीतिक शक्ति थी और राज्यों की स्वायत्तता अपेक्षाकृत सीमित हो गई थी।
  • इस प्रकार, इस परियोजना की उत्पत्ति उस राजनीतिक वातावरण में हुई जिसमें केंद्र सरकार राज्यों से अपेक्षाकृत आसानी से सहमति प्राप्त कर सकती थी। किंतु इसकी कहानी यहीं समाप्त नहीं होती।
  • आपातकाल समाप्त होने के बाद यही परियोजना भारतीय संघवाद में राज्यों की बढ़ती शक्ति, क्षेत्रीय राजनीति के उदय और केंद्र-राज्य संबंधों में आए परिवर्तन का प्रतीक बन गई।
  • और तेलुगु गंगा परियोजना मूलतः अंतर्राज्यीय जल साझेदारी (Inter-State River Water Sharing) का विषय बन गई।

क्या यह Cooperative Federalism था?

  • तेलुगु गंगा परियोजना भारतीय सहकारी संघवाद का उत्कृष्ट उदाहरण है क्योंकि इसमें चार राज्यों ने मिलकर एक साझा उद्देश्य की पूर्ति के लिए सहयोग किया। किंतु लेखक इस धारणा को चुनौती देते हैं। उनका तर्क है कि 1976 में जब यह समझौता हुआ, उस समय भारत में आपातकाल लागू था।
  • आपातकाल ने भारतीय संघवाद के स्वरूप को अस्थायी रूप से अत्यधिक केंद्रीकृत बना दिया था। संविधान के अनुच्छेद 352 के अंतर्गत राष्ट्रीय आपातकाल लागू होने के कारण केंद्र सरकार की शक्ति असाधारण रूप से बढ़ गई थी।
  • नागरिक स्वतंत्रताएँ सीमित थीं, विपक्ष कमजोर था और राज्यों की राजनीतिक स्वायत्तता पर भी प्रभाव पड़ा था। ऐसी परिस्थिति में राज्यों के लिए केंद्र की इच्छा के विरुद्ध जाना कठिन था।
  • इसलिए लेखक के अनुसार तेलुगु गंगा समझौते को केवल राज्यों के स्वैच्छिक सहयोग का परिणाम नहीं माना जा सकता; यह उस समय के शक्ति-संतुलन (Power Balance) का भी परिणाम था जिसमें केंद्र स्पष्ट रूप से अधिक शक्तिशाली स्थिति में था।

क्या है वास्तविक सहकारी संघवाद?

  • सहकारी संघवाद का अर्थ यह माना जाता है कि केंद्र और राज्य समान भागीदारी तथा आपसी विश्वास के आधार पर मिलकर कार्य करें। परंतु तेलुगु गंगा परियोजना यह प्रश्न उठाती है कि यदि सहयोग असमान राजनीतिक परिस्थितियों में उत्पन्न हुआ हो, तो क्या उसे वास्तविक सहकारी संघवाद कहा जा सकता है?
  • लेखक का तर्क है कि आपातकाल के दौरान उत्पन्न सहयोग में राज्यों की स्वतंत्र राजनीतिक क्षमता सीमित थी; अतः यह Power-driven Cooperation अर्थात शक्ति-संतुलन से प्रेरित सहयोग भी था। इस प्रकार, यह परियोजना संघवाद और राजनीतिक शक्ति के संबंध को समझने का महत्वपूर्ण माध्यम बन जाती है।
  • जल संसाधन कई बार चुनावी राजनीति, जनसमर्थन और क्षेत्रीय संतुलन का साधन बन जाते हैं। इस दृष्टि से तेलुगु गंगा परियोजना हमें यह समझाती है कि Water Governance और Political Strategy कई बार एक दूसरे से गहराई से जुड़े होते हैं।
  • संसाधनों का वितरण केवल तकनीकी दक्षता के आधार पर नहीं, बल्कि राजनीतिक प्राथमिकताओं के अनुसार भी प्रभावित हो सकता है।

आपातकाल के बाद भारतीय संघवाद में परिवर्तन : एन.टी. रामाराव और तेलुगु गंगा परियोजना

  • 1983 में आंध्र प्रदेश में तेलुगु देशम पार्टी (TDP) सत्ता में आई।
  • इसके संस्थापक एन.टी. रामाराव (N.T. Rama Rao) ने भारतीय राजनीति में क्षेत्रीय दलों की भूमिका को नई पहचान दी।
  • उन्होंने राज्यों की स्वायत्तता (State Autonomy) और संघीय संतुलन (Federal Balance) को राष्ट्रीय विमर्श का विषय बनाया।
  • NTR का मानना था कि भारतीय संघवाद में राज्यों को केवल प्रशासनिक इकाई नहीं, बल्कि समान राजनीतिक साझेदार (Equal Partners) माना जाना चाहिए।
  • उन्होंने केंद्र के अत्यधिक केंद्रीकरण (Centralisation) का विरोध किया।
  • विकेंद्रीकरण (Decentralisation) और राज्यों को अधिक अधिकार देने की मांग की।

दक्षिणी राज्यों के बीच सहयोग

  • NTR ने आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, महाराष्ट्र और तमिलनाडु के बीच समन्वय बढ़ाने का प्रयास किया।
  • उन्होंने दक्षिणी राज्यों के साझा हितों (Common Regional Interests) पर बल दिया।
  • इससे राज्यों की सामूहिक राजनीतिक शक्ति (Collective Bargaining Power) बढ़ी।

भारतीय संघवाद का निर्माणकारी क्षण‘ (Formative Federal Moment)

  • लेखक के अनुसार यह परिवर्तन भारतीय संघवाद के विकास में एक निर्णायक मोड़ था।
  • इसने दिखाया कि संघवाद केवल संविधान द्वारा निर्धारित व्यवस्था नहीं, बल्कि बदलती राजनीतिक परिस्थितियों के अनुसार विकसित होने वाली प्रक्रिया है।
  • आपातकाल के दौरान यह परियोजना केंद्र की शक्ति का प्रतीक थी।
  • लेकिन 1980 के दशक में यही परियोजना राज्यों की बढ़ती शक्ति और क्षेत्रीय राजनीति का प्रतीक बन गई।
  • इससे भारतीय संघवाद अधिक सहकारी (Cooperative) और वार्तापरक (Negotiated) स्वरूप की ओर बढ़ा।

सरकारिया आयोग (1983) और भारतीय संघवाद

  1. गठन
  • 1983 में केंद्र सरकार ने सरकारिया आयोग (Sarkaria Commission) का गठन किया।
  1. गठन का उद्देश्य
  • केंद्र-राज्य संबंधों की समीक्षा करना।
  • संघीय व्यवस्था को अधिक संतुलित एवं प्रभावी बनाना।
  • राज्यों की स्वायत्तता और राष्ट्रीय एकता के बीच संतुलन स्थापित करना।
  1. आयोग का दृष्टिकोण
  • भारत के लिए मजबूत केंद्र आवश्यक है।
  • साथ ही राज्यों को पर्याप्त सम्मान और स्वायत्तता भी मिलनी चाहिए।
  • सहयोग एवं परामर्श आधारित संघवाद को बढ़ावा दिया जाना चाहिए।
  1. प्रमुख सिफारिशें
  • अनुच्छेद 356 का सीमित एवं विवेकपूर्ण उपयोग।
  • अंतर्राज्यीय परिषद (Inter-State Council) को सक्रिय बनाना।
  • महत्वपूर्ण नीतिगत मामलों में राज्यों से नियमित परामर्श।
  • केंद्र और राज्यों के बीच विश्वास (Trust) एवं सहयोग बढ़ाना।
  1. महत्व
  • सरकारिया आयोग ने भारतीय संघवाद को अधिक संतुलित और सहभागी बनाने की दिशा दिखाई।
  • इसने सहकारी संघवाद (Cooperative Federalism) को संस्थागत आधार प्रदान किया।

निष्कर्ष

तेलुगु गंगा परियोजना भारतीय संघवाद के विकास की एक जीवंत मिसाल है। यह दर्शाती है कि अंतर्राज्यीय नदी जल समझौते केवल तकनीकी परियोजनाएँ नहीं होते, बल्कि वे राजनीतिक शक्ति-संतुलन, केंद्र-राज्य संबंधों, क्षेत्रीय आकांक्षाओं और सहकारी संघवाद की जटिल प्रक्रिया से निर्मित होते हैं। इसलिए भारत जैसे विविधतापूर्ण संघीय लोकतंत्र में जल विवादों का स्थायी समाधान केवल संवैधानिक प्रावधानों से नहीं, बल्कि निरंतर संवाद, संस्थागत सहयोग और विश्वास-आधारित संघवाद से ही संभव है।


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