हाल के समय में भारत में Generation Z (Gen Z) के नेतृत्व में बड़े पैमाने पर विरोध-प्रदर्शन देखने को मिले हैं। इन प्रदर्शनों का नेतृत्व व्यंग्यात्मक लेकिन प्रभावशाली Cockroach Janta Party (CJP) द्वारा किया गया। इन आंदोलनों का प्रमुख कारण NEET परीक्षा में कथित अनियमितताएँ, शिक्षित युवाओं में बढ़ती बेरोज़गारी तथा उच्च शिक्षा की बढ़ती लागत रही।
इन प्रदर्शनों की तुलना बांग्लादेश, नेपाल, इंडोनेशिया और पेरू जैसे देशों में हुए Gen Z आंदोलनों से भी की जा रही है। इन आंदोलनों ने यह स्पष्ट किया है कि आज का युवा केवल रोजगार या शिक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि शासन में पारदर्शिता, जवाबदेही तथा संस्थागत सुधारों की भी माँग कर रहा है।
- भारत सहित विश्वभर में Gen Z के नेतृत्व वाले आंदोलन लोकतांत्रिक राजनीति की प्रकृति को बदल रहे हैं। इन आंदोलनों का केंद्र परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता, रोजगार के अवसर, शिक्षा की बढ़ती लागत तथा शासन में उत्तरदायित्व जैसे मुद्दे हैं।
- आज का युवा केवल विरोध-प्रदर्शन नहीं कर रहा, बल्कि वह नीतिगत सुधारों, संस्थागत पारदर्शिता तथा सहभागी लोकतंत्र की माँग भी कर रहा है। यदि सरकार शिक्षा, रोजगार, मानसिक स्वास्थ्य तथा लोकतांत्रिक भागीदारी से जुड़ी समस्याओं का समय पर समाधान करती है, तो भारत अपनी जनसांख्यिकीय क्षमता (Demographic Dividend) को वास्तविक युवा लाभांश (Youth Dividend) में बदल सकता है।

वैश्विक राजनीति को किस प्रकार बदल रहे हैं Gen Z के आंदोलन?
Generation Z (Gen Z) क्या है?
- Generation Z अथवा ‘Zoomers’ उस पीढ़ी को कहा जाता है जिसका जन्म सामान्यतः 1990 के दशक के मध्य से लेकर 2010 के प्रारम्भिक वर्षों के बीच हुआ है।
- यह पीढ़ी इंटरनेट, स्मार्टफोन तथा सोशल मीडिया के साथ बड़ी हुई है, इसलिए इसे Digital Native Generation भी कहा जाता है।
- यह पीढ़ी सूचना तक तीव्र पहुँच, वैश्विक दृष्टिकोण, तकनीकी दक्षता तथा सामाजिक-राजनीतिक मुद्दों के प्रति अधिक जागरूकता के कारण पूर्ववर्ती पीढ़ियों से अलग मानी जाती है। यही कारण है कि आज यह लोकतांत्रिक विमर्श में एक प्रभावशाली सामाजिक एवं राजनीतिक शक्ति के रूप में उभर रही है।
राजनीति में Gen Z की भूमिका
- आज की युवा पीढ़ी पारंपरिक राजनीतिक दलों या संगठनों पर पूरी तरह निर्भर नहीं है। यह सोशल मीडिया, डिजिटल मंचों, ऑनलाइन अभियानों तथा विकेन्द्रित नेटवर्क के माध्यम से भ्रष्टाचार, बेरोज़गारी, असमानता, शिक्षा सुधार तथा प्रशासनिक जवाबदेही जैसे मुद्दों पर तेज़ी से संगठित हो जाती है।
- इन आंदोलनों की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इनमें किसी एक करिश्माई नेता की बजाय सामूहिक नेतृत्व, डिजिटल समन्वय तथा मुद्दा-आधारित भागीदारी देखने को मिलती है। कई देशों में ऐसे आंदोलनों ने सरकारों को नीतियाँ बदलने, विवादास्पद निर्णय वापस लेने तथा राजनीतिक सुधार लागू करने के लिए बाध्य किया है।
वैश्विक उदाहरण (Global Examples)
बांग्लादेश (Bangladesh): बांग्लादेश में सरकारी नौकरियों में आरक्षण (Job Quota) को लेकर छात्रों द्वारा व्यापक आंदोलन चलाया गया। यह आंदोलन धीरे-धीरे राष्ट्रीय राजनीतिक संकट में बदल गया, जिसके परिणामस्वरूप तत्कालीन सरकार को सत्ता छोड़नी पड़ी तथा अंतरिम नेतृत्व के अंतर्गत नए चुनावों की प्रक्रिया प्रारम्भ हुई।
नेपाल (Nepal): नेपाल में युवाओं ने व्यापक भ्रष्टाचार तथा प्रशासनिक अक्षमता के विरुद्ध आंदोलन किया। इन प्रदर्शनों ने राजनीतिक परिवर्तन को गति दी और नई नेतृत्वकारी शक्तियों के उभरने का मार्ग प्रशस्त किया। इससे यह स्पष्ट हुआ कि संगठित युवा लोकतांत्रिक परिवर्तन का महत्वपूर्ण माध्यम बन सकते हैं।
इंडोनेशिया (Indonesia): इंडोनेशिया में आर्थिक कठिनाइयों के बीच सांसदों को मिलने वाले विशेषाधिकारों के विरुद्ध युवाओं ने व्यापक विरोध-प्रदर्शन किए। जनदबाव के कारण सरकार को कई विवादास्पद प्रस्ताव वापस लेने पड़े, जिससे लोकतांत्रिक उत्तरदायित्व को बल मिला।
पेरू (Peru): पेरू में बढ़ते अपराध, राजनीतिक अस्थिरता तथा शासन संबंधी समस्याओं के विरुद्ध युवाओं ने व्यापक प्रदर्शन किए। इन आंदोलनों ने राजनीतिक अस्थिरता को और बढ़ाया तथा लगातार नेतृत्व परिवर्तन की स्थिति उत्पन्न हुई।
भारत (India): भारत में NEET परीक्षा में कथित पेपर लीक, परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता, शिक्षित युवाओं में बढ़ती बेरोज़गारी तथा शिक्षा की बढ़ती लागत के विरोध में व्यापक प्रदर्शन हुए। इन आंदोलनों के परिणामस्वरूप सरकार को कई माँगें स्वीकार करनी पड़ीं तथा शिक्षा प्रशासन में जवाबदेही को लेकर गंभीर बहस प्रारम्भ हुई।
भारत में युवा आंदोलनों का विकास (Evolution of Youth Movements in India)
- वैचारिक राजनीति का दौर (1950–1960 का दशक)
- स्वतंत्रता के बाद के प्रारम्भिक दशकों में अधिकांश छात्र आंदोलन विश्वविद्यालय परिसरों तक सीमित थे। इन पर वामपंथी एवं दक्षिणपंथी छात्र संगठनों जैसे SFI तथा ABVP का गहरा प्रभाव था। उस समय भाषा, शिक्षा नीति तथा वैचारिक संघर्ष प्रमुख मुद्दे थे।
- इसी काल में 1965 का हिंदी–विरोधी आंदोलन (तमिलनाडु) तथा 1967 का नक्सलबाड़ी आंदोलन सामने आया, जिनमें छात्रों ने सक्रिय भूमिका निभाई। इन आंदोलनों ने भारतीय छात्र राजनीति को वैचारिक आधार प्रदान किया।
- सत्ता–विरोधी एवं लोकतांत्रिक आंदोलन (1970 का दशक)
- 1970 के दशक में छात्र आंदोलन केवल विश्वविद्यालय परिसरों तक सीमित नहीं रहे, बल्कि भ्रष्टाचार, महँगाई तथा निरंकुश शासन के विरुद्ध राष्ट्रीय स्तर पर फैल गए।
- इस अवधि में 1974 का नव निर्माण आंदोलन (गुजरात) तथा जयप्रकाश नारायण (जेपी) आंदोलन विशेष रूप से उल्लेखनीय रहे। इन आंदोलनों ने लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा, भ्रष्टाचार के विरोध तथा सत्ता के दुरुपयोग के विरुद्ध व्यापक जनसमर्थन प्राप्त किया और आगे चलकर आपातकाल की पृष्ठभूमि तैयार की।
- पहचान, क्षेत्रवाद एवं सामाजिक न्याय का दौर (1980-1990 का दशक)
- इस चरण में युवा आंदोलनों का केंद्र भाषा या वैचारिक राजनीति से हटकर क्षेत्रीय पहचान, प्रवासन तथा आरक्षण जैसे विषय बन गए।
- इस अवधि के प्रमुख आंदोलनों में असम आंदोलन (1979-1985) शामिल था, जिसका नेतृत्व ऑल असम स्टूडेंट्स यूनियन (AASU) ने किया। इस आंदोलन का परिणाम असम समझौते (1985) के रूप में सामने आया। इसी काल में मंडल आयोग के विरोध में 1990 के छात्र आंदोलन ने भी भारतीय राजनीति पर गहरा प्रभाव डाला।
- अधिकार–आधारित आंदोलन (2000–2010 का दशक)
- इंटरनेट और सोशल मीडिया के प्रसार के साथ युवा आंदोलनों का स्वरूप भी बदलने लगा। इस अवधि में पारदर्शिता, जवाबदेही, भ्रष्टाचार-विरोध तथा नागरिक अधिकार प्रमुख मुद्दे बनकर उभरे।
- 2011 का अन्ना हज़ारे आंदोलन (India Against Corruption) तथा 2012 का निर्भया आंदोलन इस दौर के सबसे प्रभावशाली उदाहरण रहे। इन आंदोलनों ने जनलोकपाल की माँग, महिला सुरक्षा, आपराधिक कानूनों में सुधार तथा नागरिक भागीदारी को नई दिशा प्रदान की।
- Gen Z और मुद्दा–आधारित आंदोलन (2020 से वर्तमान तक)
- वर्तमान दौर में युवा आंदोलन पूरी तरह डिजिटल, विकेन्द्रीकृत तथा मुद्दा–आधारित हो चुके हैं। अब इनका प्रमुख फोकस शिक्षा सुधार, रोजगार, परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता, सामाजिक न्याय तथा सुशासन पर है।
- इस अवधि के प्रमुख उदाहरणों में CAA-NRC विरोध प्रदर्शन, अग्निपथ योजना के विरुद्ध आंदोलन तथा 2026 का Cockroach Janta Party (CJP) आंदोलन शामिल हैं, जिसने NEET पेपर लीक, बेरोज़गारी तथा शिक्षा की बढ़ती लागत जैसे मुद्दों को राष्ट्रीय बहस का विषय बना दिया।
युवा असंतोष को दूर करने एवं लोकतांत्रिक भागीदारी को सशक्त बनाने के उपाय (Way Forward)
भारत के पास विश्व की सबसे बड़ी युवा आबादी है। यदि इस युवा शक्ति को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, रोजगार, नवाचार तथा लोकतांत्रिक भागीदारी के अवसर उपलब्ध कराए जाएँ, तो यह देश के विकास का सबसे बड़ा आधार बन सकती है। इसके लिए केवल आर्थिक सुधार पर्याप्त नहीं होंगे, बल्कि शिक्षा, शासन, मानसिक स्वास्थ्य, रोजगार तथा लोकतांत्रिक संस्थाओं में व्यापक सुधार आवश्यक हैं।
- जनसांख्यिकीय लाभांश से ‘युवा लाभांश‘ (Youth Dividend) की ओर बढ़ना
- भारत को केवल बड़ी युवा आबादी होने पर गर्व करने के बजाय ऐसी नीतियाँ अपनानी चाहिए जो युवाओं की वास्तविक आवश्यकताओं को नीति-निर्माण के केंद्र में रखें। इसके लिए ‘Youth in All Policies (YiAP)’ दृष्टिकोण अपनाया जा सकता है, जैसा कि फिनलैंड में किया गया है।
- इस मॉडल के अंतर्गत शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य, जलवायु परिवर्तन, डिजिटल अर्थव्यवस्था तथा तकनीकी नवाचार से संबंधित प्रत्येक प्रमुख नीति का मूल्यांकन इस आधार पर किया जाता है कि उसका युवाओं पर क्या प्रभाव पड़ेगा। इससे नीतियाँ अधिक समावेशी एवं भविष्य उन्मुख बनती हैं।
- नए युग की रोजगार अर्थव्यवस्था (New-Age Employment Ecosystem) का विकास
- भारत को पारंपरिक सरकारी या निजी नौकरियों पर निर्भर रहने के बजाय उभरते हुए रोजगार क्षेत्रों को प्रोत्साहित करना चाहिए। विशेष रूप से Orange Economy (रचनात्मक उद्योग), Creator Economy, Sports Economy, Care Economy, Space Economy तथा Green Economy जैसे क्षेत्रों में रोजगार की व्यापक संभावनाएँ उपलब्ध हैं।
- सरकार को इन क्षेत्रों में स्टार्टअप प्रोत्साहन, नवाचार वित्तपोषण, कौशल विकास, बौद्धिक संपदा (IPR) संरक्षण तथा उद्यमिता समर्थन उपलब्ध कराना चाहिए। इससे युवाओं के लिए रोजगार के विविध अवसर विकसित होंगे तथा अर्थव्यवस्था अधिक प्रतिस्पर्धी बनेगी।
- शासन में युवाओं की संस्थागत भागीदारी सुनिश्चित करना
- युवाओं की भूमिका केवल चुनावों में मतदान या विरोध-प्रदर्शनों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। उन्हें नीति-निर्माण की प्रक्रिया में औपचारिक रूप से शामिल किया जाना आवश्यक है।
- इसके लिए सिंगापुर के National Youth Council की तर्ज पर भारत में भी एक प्रभावी राष्ट्रीय युवा परिषद (National Youth Council) का गठन किया जा सकता है। साथ ही युवा संसद (Youth Parliament) जैसे मंचों को अधिक प्रभावी बनाकर युवाओं को नीतिगत सुझाव देने, लोकतांत्रिक संवाद में भाग लेने तथा शासन प्रक्रिया को समझने का अवसर प्रदान किया जाना चाहिए।
- योग्यता आधारित व्यवस्था (Meritocracy) में विश्वास बहाल करना
- प्रतियोगी परीक्षाओं की विश्वसनीयता लोकतांत्रिक व्यवस्था में सामाजिक गतिशीलता (Social Mobility) का सबसे महत्वपूर्ण आधार है। इसलिए पेपर लीक, परीक्षा में धोखाधड़ी तथा भर्ती प्रक्रियाओं में विलंब जैसी समस्याओं का त्वरित समाधान अत्यंत आवश्यक है।
- इसके लिए लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024 के अंतर्गत गठित Fast Track Special Courts (FTSCs) को पर्याप्त न्यायिक संसाधन, तकनीकी सहायता तथा मानव संसाधन उपलब्ध कराए जाने चाहिए, ताकि पेपर लीक से संबंधित मामलों का शीघ्र निपटारा हो सके।
- इसके साथ ही राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) को अधिक स्वायत्त एवं उत्तरदायी संस्था बनाया जाना चाहिए। परीक्षा प्रणाली में Blockchain आधारित प्रमाण–पत्र सत्यापन, Zero Trust Examination Architecture, AI आधारित निगरानी प्रणाली तथा End-to-End Encrypted Digital Testing Infrastructure जैसे आधुनिक तकनीकी उपाय अपनाकर परीक्षाओं की पारदर्शिता एवं विश्वसनीयता को सुदृढ़ किया जा सकता है।
- चौथी औद्योगिक क्रांति के अनुरूप शिक्षा व्यवस्था का पुनर्गठन
- भारत की शिक्षा प्रणाली को केवल डिग्री प्रदान करने तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उसे भविष्य की अर्थव्यवस्था के अनुरूप कौशल विकसित करने चाहिए।
- इसके लिए राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP), 2020 का प्रभावी क्रियान्वयन आवश्यक है। उच्च शिक्षा में Artificial Intelligence (AI), Entrepreneurship, Climate Literacy, Digital Public Infrastructure, Financial Literacy तथा Design Thinking जैसे विषयों को समाहित किया जाना चाहिए।
- साथ ही प्रत्येक स्नातक कार्यक्रम में Apprenticeship (प्रशिक्षुता) को अनिवार्य बनाया जाए, जिससे छात्रों को उद्योगों का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त हो सके और उनकी रोजगार क्षमता में वृद्धि हो।
- राष्ट्रीय युवा कल्याण मिशन (National Youth Well-being Mission) की स्थापना
- युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य को शिक्षा एवं रोजगार नीति का अभिन्न भाग बनाया जाना चाहिए। परीक्षा तनाव, बेरोज़गारी तथा सामाजिक दबाव के कारण बढ़ती मानसिक समस्याओं को केवल व्यक्तिगत नहीं, बल्कि सार्वजनिक नीति के मुद्दे के रूप में देखा जाना चाहिए।
- ऑस्ट्रेलिया के Headspace Model तथा यूनाइटेड किंगडम की Student Mental Health Framework से प्रेरणा लेते हुए भारत में विद्यालयों, विश्वविद्यालयों तथा कोचिंग संस्थानों में पेशेवर Counselling Services, Career Guidance Centres तथा Suicide Prevention Mechanisms स्थापित किए जाने चाहिए।
- सफलता के अनेक मार्ग (Multiple Pathways to Success) विकसित करना
- भारत में अधिकांश युवा अपने भविष्य के लिए कुछ सीमित प्रतियोगी परीक्षाओं पर अत्यधिक निर्भर रहते हैं। इससे परीक्षा संबंधी तनाव एवं प्रतिस्पर्धा अत्यधिक बढ़ जाती है।
- इस स्थिति को बदलने के लिए PARAKH जैसी मूल्यांकन प्रणाली को व्यापक बनाया जाना चाहिए। साथ ही एक ही परीक्षा के Multiple Testing Windows, Micro-Credentials, Skill-based Hiring तथा सतत मूल्यांकन जैसी व्यवस्थाओं को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।
- जर्मनी एवं सिंगापुर जैसे देशों की तरह कौशल आधारित रोजगार प्रणाली विकसित करने से युवाओं को सफलता के विविध अवसर प्राप्त होंगे।
- नागरिक नवाचार एवं सामाजिक उद्यमिता (Civic Innovation and Social Entrepreneurship) को प्रोत्साहन
- भारत के युवाओं में नवाचार की अपार क्षमता है। सरकार को ऐसे संस्थागत ढाँचे विकसित करने चाहिए जो युवाओं को सामाजिक समस्याओं के समाधान हेतु तकनीकी नवाचार, सामाजिक उद्यम तथा सामुदायिक परियोजनाओं में भाग लेने के लिए प्रेरित करें।
- Atal Innovation Mission तथा Startup India जैसी पहलों को और अधिक सुदृढ़ बनाते हुए Youth Innovation Missions एवं Civic-Tech Incubators की स्थापना की जानी चाहिए।
यदि आप इस विषय को UPSC GS-2 (Democracy, Governance, Civil Society) के दृष्टिकोण से मजबूत बनाना चाहते हैं, तो इसे केवल “युवा आंदोलन” के रूप में नहीं बल्कि लोकतंत्र के सिद्धांतों (Theories of Democracy) से जोड़ना चाहिए। इससे उत्तर अधिक अकादमिक और उच्च गुणवत्ता का बनता है।
लोकतंत्र के सिद्धांतों के आलोक में Gen Z आंदोलन (Theoretical Linkage with Democracy)
- सहभागी लोकतंत्र (Participatory Democracy)
प्रमुख विचारक: Carole Pateman, Jean-Jacques Rousseau
सहभागी लोकतंत्र के अनुसार लोकतंत्र केवल मतदान तक सीमित नहीं है, बल्कि नागरिकों की निरंतर नीति–निर्माण एवं सार्वजनिक विमर्श में भागीदारी आवश्यक है।
Gen Z आंदोलन से संबंध
- Gen Z केवल चुनावों में मतदान नहीं कर रही, बल्कि शिक्षा, रोजगार, परीक्षा सुधार एवं पारदर्शिता जैसे मुद्दों पर सक्रिय भागीदारी कर रही है।
- डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से युवाओं की भागीदारी सहभागी लोकतंत्र का नया स्वरूप प्रस्तुत करती है।
- इससे लोकतंत्र अधिक जीवंत एवं उत्तरदायी बनता है।
Gen Z protests signify the transition from electoral democracy to participatory democracy.
- विचार–विमर्श आधारित लोकतंत्र (Deliberative Democracy)
प्रमुख विचारक: Jürgen Habermas, John Dryzek
लोकतंत्र की गुणवत्ता केवल मतदान से नहीं, बल्कि तर्कसंगत सार्वजनिक संवाद (Reasoned Public Deliberation) से निर्धारित होती है।
Gen Z आंदोलन से संबंध
- सोशल मीडिया के माध्यम से युवा राष्ट्रीय मुद्दों पर बहस प्रारम्भ कर रहे हैं।
- NEET, बेरोज़गारी तथा शिक्षा सुधार जैसे मुद्दों को सार्वजनिक विमर्श का विषय बनाया गया।
- यदि सरकार इन मुद्दों पर संवाद करती है तो लोकतंत्र मजबूत होता है।
लेकिन चुनौती
Fake News, Echo Chambers तथा Algorithmic Bias स्वस्थ लोकतांत्रिक विमर्श को कमजोर कर सकते हैं।

- प्रतिवादी लोकतंत्र (Counter Democracy)
प्रमुख विचारक: Pierre Rosanvallon
आधुनिक लोकतंत्र में नागरिक केवल प्रतिनिधियों का चुनाव नहीं करते, बल्कि सरकार की निरंतर निगरानी (Surveillance), मूल्यांकन (Evaluation) एवं विरोध (Protest) भी करते हैं।
Gen Z आंदोलन से संबंध
- पेपर लीक, परीक्षा भ्रष्टाचार तथा भर्ती अनियमितताओं के विरुद्ध आंदोलन सरकार की जवाबदेही सुनिश्चित करने का माध्यम हैं।
- युवा सरकार पर दबाव बनाकर संस्थागत सुधारों की माँग कर रहे हैं।
Gen Z represents the rise of counter-democracy where citizens constantly monitor and challenge public institutions.
- बहुलवादी लोकतंत्र (Pluralist Democracy)
प्रमुख विचारक: Robert Dahl
लोकतंत्र में विभिन्न हित समूह (Interest Groups) सरकार को प्रभावित करते हैं।
Gen Z आंदोलन से संबंध
- Gen Z एक नए Interest Group के रूप में उभरी है।
- यह जाति एवं धर्म आधारित राजनीति से आगे बढ़कर रोजगार, शिक्षा एवं जलवायु परिवर्तन जैसे नए मुद्दों को राजनीतिक एजेंडा बना रही है।
- विमर्शात्मक सार्वजनिक क्षेत्र (Public Sphere Theory)
प्रमुख विचारक: Jürgen Habermas
लोकतंत्र के लिए स्वतंत्र सार्वजनिक मंच आवश्यक हैं जहाँ नागरिक समान रूप से विचार व्यक्त कर सकें।
Gen Z आंदोलन से संबंध
- Instagram, X (Twitter), Reddit, YouTube आदि नए Public Sphere बन गए हैं।
- डिजिटल प्लेटफॉर्म लोकतांत्रिक संवाद को विस्तृत करते हैं।
- परंतु Hate Speech, Misinformation एवं Digital Manipulation लोकतंत्र के लिए चुनौती भी हैं।
- सामाजिक पूंजी सिद्धांत (Social Capital Theory)
प्रमुख विचारक: Robert Putnam
विश्वास (Trust), सहयोग (Cooperation) एवं नागरिक भागीदारी लोकतंत्र को मजबूत बनाती है।
Gen Z आंदोलन से संबंध
- युवा सामूहिक कार्रवाई (Collective Action) के माध्यम से सामाजिक पूंजी का निर्माण करते हैं।
- लेकिन पेपर लीक एवं संस्थागत विफलता से सार्वजनिक विश्वास कमजोर होता है।
- वैधता सिद्धांत (Legitimacy Theory)
प्रमुख विचारक: Max Weber, David Beetham
सरकार की वैधता केवल चुनाव जीतने से नहीं बल्कि निष्पक्षता, पारदर्शिता एवं प्रभावी शासन से प्राप्त होती है।
Gen Z आंदोलन से संबंध
- परीक्षा अनियमितताएँ संस्थागत वैधता को कमजोर करती हैं।
- युवाओं का विरोध वैधता के संकट (Crisis of Legitimacy) का संकेत है।
- सामाजिक अनुबंध सिद्धांत (Social Contract Theory)
प्रमुख विचारक: Hobbes, Locke, Rousseau
राज्य नागरिकों को सुरक्षा, समान अवसर एवं न्याय प्रदान करेगा, जबकि नागरिक राज्य की वैधता स्वीकार करेंगे।
Gen Z आंदोलन से संबंध
- पेपर लीक, भर्ती में देरी एवं बेरोज़गारी युवाओं को यह महसूस कराती है कि राज्य सामाजिक अनुबंध का पालन नहीं कर रहा।
- इसलिए युवाओं का विरोध सामाजिक अनुबंध के पुनर्संतुलन की माँग है।
- उत्तरदायी लोकतंत्र (Responsive Democracy)
प्रमुख विचारक: Robert Dahl
एक लोकतांत्रिक सरकार वही है जो नागरिकों की माँगों के प्रति संवेदनशील एवं उत्तरदायी हो।
Gen Z आंदोलन से संबंध
- यदि सरकार परीक्षा सुधार, रोजगार एवं शिक्षा संबंधी सुधार करती है, तो लोकतंत्र की उत्तरदायित्व क्षमता बढ़ती है।
- यदि माँगों की उपेक्षा होती है, तो लोकतांत्रिक असंतोष गहरा सकता है।
- लोकतांत्रिक सुदृढ़ीकरण (Democratic Deepening)
लोकतंत्र केवल चुनावों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि निरंतर नागरिक सहभागिता, संस्थागत सुधार और जवाबदेही के माध्यम से गहरा होता है।
Gen Z आंदोलन से संबंध
- Gen Z आंदोलन लोकतंत्र को चुनौती नहीं देते, बल्कि उसे अधिक पारदर्शी, सहभागी, उत्तरदायी एवं समावेशी बनाने की दिशा में कार्य करते हैं।
- इस प्रकार ये आंदोलन Democratic Deepening का उदाहरण हैं।

प्रमुख कथन
- Carole Pateman: Participation strengthens democracy by educating citizens.
- Jürgen Habermas: Democracy thrives through public reasoning.
- Robert Dahl: Democracy requires continuous responsiveness to citizens.
- Pierre Rosanvallon: Modern democracy is sustained through vigilance, oversight and protest.
- Robert Putnam: Social capital is the foundation of effective democracy.
- David Beetham: Legitimacy depends on rule-based, accountable governance.
- Rousseau: Sovereignty ultimately resides with the people.
- Amartya Sen: Public reasoning is central to democratic development.
- B. R. Ambedkar: Political democracy must rest on social and economic democracy.
- Alexis de Tocqueville: Active civic associations are the lifeblood of democracy.
निष्कर्ष (Conclusion)
युवा आंदोलनों को केवल विरोध-प्रदर्शन या असंतोष की अभिव्यक्ति के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि उन्हें लोकतंत्र के ‘Feedback Mechanism’ के रूप में समझना चाहिए। ये आंदोलन सरकार और समाज को यह संकेत देते हैं कि युवाओं की आकांक्षाएँ, अपेक्षाएँ और चुनौतियाँ बदल रही हैं तथा नीतियों को भी उसी अनुरूप विकसित होना होगा।
यदि भारत शिक्षा, रोजगार, परीक्षा प्रणाली, मानसिक स्वास्थ्य, नवाचार तथा लोकतांत्रिक भागीदारी में व्यापक सुधार लागू करने में सफल होता है, तो उसकी विशाल युवा आबादी केवल जनसांख्यिकीय लाभांश (Demographic Dividend) तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि वह वास्तविक युवा लाभांश (Youth Dividend) में परिवर्तित होकर ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य को साकार करने की सबसे बड़ी शक्ति बनेगी।
MCQ
- निम्नलिखित में से कौन–सा कारण युवाओं में लोकतांत्रिक विमुखता (Democratic Alienation) को बढ़ाता है?
- युवाओं के मुद्दों का पर्याप्त राजनीतिक प्रतिनिधित्व न होना।
- असहमति के लोकतांत्रिक स्थान का सिकुड़ना।
- संस्थागत संवाद की कमी।
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कीजिए:
(a) केवल 1 और 2
(b) केवल 2 और 3
(c) केवल 1 और 3
(d) 1, 2 और 3
उत्तर: (d)
- ‘Youth in All Policies (YiAP)’ मॉडल का संबंध किस देश से है?
(a) जर्मनी
(b) सिंगापुर
(c) फिनलैंड
(d) ऑस्ट्रेलिया
उत्तर: (c)
- निम्नलिखित में से कौन–सा उपाय प्रतियोगी परीक्षाओं में विश्वास बहाल करने से संबंधित है?
(a) Blockchain आधारित Credential Verification
(b) AI आधारित परीक्षा निगरानी
(c) Fast Track Special Courts
(d) उपर्युक्त सभी
उत्तर: (d)
- निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- Gen Z आंदोलन पारंपरिक करिश्माई नेतृत्व की अपेक्षा डिजिटल नेटवर्क आधारित होते हैं।
- इन आंदोलनों का प्रमुख फोकस शिक्षा, रोजगार, सुशासन तथा सामाजिक न्याय जैसे मुद्दे हैं।
- भारत में वर्तमान युवा आंदोलन पूर्णतः राजनीतिक दलों द्वारा नियंत्रित हैं।
उपरोक्त में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
(a) केवल 1 और 2
(b) केवल 2 और 3
(c) केवल 1 और 3
(d) 1, 2 और 3
उत्तर: (a)
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