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हंस जे. मॉर्गनथाऊ: अंतरराष्ट्रीय संबंधों में शक्ति और विचारधारा

Hans J. Morgenthau: Power and Ideology in International Relations

अंतरराष्ट्रीय संबंधों (International Relations) के अध्ययन में हंस जे. मॉर्गनथाऊ का स्थान शास्त्रीय यथार्थवाद (Classical Realism) के सबसे प्रभावशाली विचारकों में है। Morgenthau ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति (International Politics) को मुख्यतः शक्ति (Power), राष्ट्रीय हित (National Interest) और राजनीतिक विवेक (Political Prudence) के संदर्भ में समझने का प्रयास किया।

उनकी प्रसिद्ध कृति Politics Among Nations ने अंतरराष्ट्रीय संबंधों के अध्ययन में यह स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई कि राज्यों के व्यवहार को समझने के लिए केवल उनके घोषित नैतिक उद्देश्यों (Moral Objectives), कानूनी दावों (Legal Claims) या वैचारिक घोषणाओं (Ideological Pronouncements) पर निर्भर नहीं किया जा सकता। इसके पीछे शक्ति (Power), सुरक्षा (Security) और राष्ट्रीय हित की वास्तविक राजनीति (Realpolitik) को भी समझना आवश्यक है।

Morgenthau का उद्देश्य यह कहना नहीं है कि सभी विचारधाराएँ (Ideologies) झूठी होती हैं। उनका मुख्य तर्क यह है कि विचारधारा (Ideology) और नैतिकता (Morality) को अंतरराष्ट्रीय राजनीति की वास्तविक शक्ति गतिशीलता (Power Dynamics) से अलग करके नहीं देखा जा सकता।

Morgenthau का शास्त्रीय यथार्थवाद (Classical Realism)

Morgenthau को समझने के लिए सबसे पहले उनके शास्त्रीय यथार्थवाद (Classical Realism) को समझना आवश्यक है। शास्त्रीय यथार्थवाद के अनुसार अंतरराष्ट्रीय राजनीति में संघर्ष की जड़ें मानव स्वभाव (Human Nature), शक्ति की इच्छा (Lust for Power / Animis Dominandi), असुरक्षा (Insecurity) और प्रतिस्पर्धी हितों (Competing Interests) में पाई जाती हैं।

  • Morgenthau के लिए अंतरराष्ट्रीय राजनीति मूलतः शक्ति के लिए संघर्ष (Struggle for Power) है। इसका अर्थ यह नहीं है कि प्रत्येक राज्य हर समय युद्ध करना चाहता है। इसका अर्थ यह है कि राज्य अपने अस्तित्व (Survival), सुरक्षा (Security) और राष्ट्रीय हितों की रक्षा करने के लिए शक्ति का निर्माण और उपयोग करते हैं।
  • अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था में कोई ऐसी सर्वोच्च विश्व सरकार (World Government) नहीं है जो प्रत्येक राज्य की सुरक्षा की गारंटी दे सके। इस अंतरराष्ट्रीय अराजकता (International Anarchy) की स्थिति में राज्य अपनी सुरक्षा के लिए आत्म-निर्भरता (Self-Help) पर निर्भर रहते हैं।
  • इस स्थिति में शक्ति केवल प्रभुत्व (Domination) प्राप्त करने का माध्यम नहीं, बल्कि अस्तित्व (Survival) और राष्ट्रीय हित (National Interest) की रक्षा का साधन भी बन जाती है। यही कारण है कि Morgenthau के लिए अंतरराष्ट्रीय राजनीति को समझने का केंद्रीय विश्लेषणात्मक विचार (Analytical Concept) शक्ति (Power) है।

Morgenthau के अनुसार शक्ति (Power) की अवधारणा

  • Morgenthau के लिए शक्ति का अर्थ केवल सैन्य शक्ति (Military Power) नहीं है। शक्ति वह क्षमता (Capacity/Capability) है जिसके माध्यम से एक राज्य दूसरे राज्यों के मस्तिष्कों और कार्यों (Minds and Actions) को नियंत्रित या प्रभावित कर सकता है।
  • इस दृष्टिकोण में सैन्य क्षमता (Military Capability) महत्वपूर्ण है, लेकिन उसके साथ आर्थिक संसाधन (Economic Resources), भूगोल (Geography), जनसंख्या (Population), राष्ट्रीय मनोबल (National Morale), राष्ट्रीय चरित्र (National Character), कूटनीति की गुणवत्ता (Diplomatic Quality) और राजनीतिक नेतृत्व (Political Leadership) जैसे तत्व भी राष्ट्रीय शक्ति (National Power) को निर्धारित करते हैं।

इसलिए किसी राज्य की शक्ति को केवल उसके हथियारों की संख्या से मापना पर्याप्त नहीं है। एक राज्य की वास्तविक प्रभाव क्षमता इस बात पर भी निर्भर करती है कि वह उपलब्ध संसाधनों को कितनी कुशलता से कूटनीतिक और राजनीतिक परिणामों (Diplomatic and Political Outcomes) में बदल सकता है।

राष्ट्रीय हित (National Interest): Morgenthau के यथार्थवाद का केंद्र

  • Morgenthau के यथार्थवाद में राष्ट्रीय हित (National Interest) केंद्रीय अवधारणा है। उनका मानना था कि विदेश नीति (Foreign Policy) का विश्लेषण करते समय सबसे पहले यह समझना चाहिए कि राज्य अपने राष्ट्रीय हित को किस प्रकार परिभाषित करता है।
  • Morgenthau ने राष्ट्रीय हित को मुख्य रूप से शक्ति के संदर्भ में परिभाषित हित (National Interest Defined in Terms of Power) के रूप में समझने पर बल दिया। राज्य अपनी सुरक्षा (Security), राजनीतिक स्वतंत्रता (Political Autonomy) और अस्तित्व (Survival) को बनाए रखने के लिए शक्ति का उपयोग करते हैं।

  • इसका अर्थ यह नहीं है कि राष्ट्रीय हित हमेशा एक जैसा (Static/Fixed) रहता है। किसी राज्य की भौगोलिक स्थिति, तकनीकी क्षमता (Technological Capabilities), आर्थिक परिस्थितियाँ, सुरक्षा वातावरण और अंतरराष्ट्रीय शक्ति संतुलन (Balance of Power) में बदलाव के साथ उसके राष्ट्रीय हितों की प्राथमिकताएँ भी बदल सकती हैं।
  • इसलिए Morgenthau के ढांचे में राष्ट्रीय हित  विदेश नीति  शक्ति राजनीति (National Interest  Foreign Policy  Power Politics) एक-दूसरे से गहराई से जुड़े हुए हैं।

शक्ति (Power) और विचारधारा (Ideology) का संबंध

  • Morgenthau के विचारों का सबसे महत्वपूर्ण पक्ष यह है कि वे शक्ति (Power) और विचारधारा (Ideology) को परस्पर संबंधित मानते हैं।
  • अंतरराष्ट्रीय राजनीति में राज्य अपनी विदेश नीति को केवल राष्ट्रीय हित के रूप में प्रस्तुत नहीं करते। वे अक्सर अपने कार्यों को किसी व्यापक नैतिक या वैचारिक उद्देश्य (Moral or Ideological Purpose) के रूप में प्रस्तुत करते हैं।

  • कोई राज्य अपनी विदेश नीति को लोकतंत्र की रक्षा (Defense of Democracy), स्वतंत्रता की सुरक्षा (Protection of Freedom), अंतरराष्ट्रीय शांति (International Peace), सभ्यता (Civilization) या मानवता की सेवा (Service of Humanity) के रूप में प्रस्तुत कर सकता है।
  • लेकिन Morgenthau हमें यह देखने के लिए प्रेरित करते हैं कि इन वैचारिक दावों (Ideological Claims) के पीछे कौन से रणनीतिक हित (Strategic Interests) मौजूद हैं।
  • इस प्रकार विचारधारा कभी-कभी शक्ति की राजनीति को वैध बनाने (Legitimise) का माध्यम बन सकती है।
  • Morgenthau यह नहीं कहते कि विचारधारा हमेशा केवल छल (Deception) या दुष्प्रचार (Propaganda) है; उनका तर्क यह है कि विचारधारा के घोषित उद्देश्यों और उसके पीछे मौजूद राष्ट्रीय हित को अलग-अलग विश्लेषणात्मक स्तरों (Analytical Levels) पर देखना चाहिए।

राष्ट्रीय हित के आवरण के रूप में विचारधारा (Ideology as a Mask for National Interest)

  • Morgenthau के अनुसार विचारधारा प्रायः राष्ट्रीय हित को छिपाने (Conceal) या न्यायोचित ठहराने (Justify) का कार्य करती है।
  • जब कोई राज्य अपने विशेष राष्ट्रीय हित (Particular National Interest) को सार्वभौमिक हित (Universal Interest) के रूप में प्रस्तुत करता है, तो वह अपने नीतिगत उद्देश्यों को अधिक स्वीकार्य (Legitimate and Acceptable) बनाने का प्रयास करता है।
  • उदाहरण के लिए, किसी राज्य के रणनीतिक हस्तक्षेप (Strategic Intervention) को भू-राजनीतिक हित (Geopolitical Interest) कहने के बजाय स्वतंत्रता (Freedom) या मानवाधिकार (Human Rights) की रक्षा के रूप में प्रस्तुत किया जा सकता है।
  • इस प्रकार अंतरराष्ट्रीय राजनीति का आलोचनात्मक विश्लेषण (Critical Analysis) यह पूछता है कि घोषित नीति के पीछे सुरक्षा (Security), रणनीतिक प्रभाव (Strategic Influence), आर्थिक लाभ (Economic Gain) और शक्ति संतुलन (Balance of Power) के वास्तविक उद्देश्य क्या हैं।

वैचारिक संघर्ष और शक्ति राजनीति (Ideological Conflict and Power Politics)

  • Morgenthau के दृष्टिकोण से वैचारिक संघर्ष को केवल विचारों के संघर्ष (Clash of Ideas) के रूप में समझना पर्याप्त नहीं है। वैचारिक मतभेदों के पीछे गहरी भू-राजनीतिक और रणनीतिक प्रतिस्पर्धा (Geopolitical and Strategic Competition) मौजूद होती है।
  • शीत युद्ध (Cold War) इसका स्पष्ट उदाहरण है। अमेरिका और सोवियत संघ के बीच पूंजीवाद (Capitalism) और साम्यवाद (Communism) का वैचारिक संघर्ष था, लेकिन इसके साथ परमाणु प्रतिस्पर्धा (Nuclear Arms Race), सैन्य गठबंधन (Military Alliances), प्रभाव क्षेत्र (Spheres of Influence) और रणनीतिक सुरक्षा चिंताएं (Strategic Security Concerns) भी जुड़ी हुई थीं।
  • इसलिए शीत युद्ध केवल विचारधारा की लड़ाई नहीं था, बल्कि यह विचारधारा + शक्ति + सुरक्षा + भू-राजनीति (Ideology + Power + Security + Geopolitics) का संयुक्त संघर्ष था।

Morgenthau और वैचारिक निरपेक्षतावाद (Ideological Absolutism)

  • Morgenthau की एक मुख्य चिंता यह थी कि वैचारिक निरपेक्षतावाद (Ideological Absolutism) अंतरराष्ट्रीय संघर्ष को विनाशकारी बना सकता है।
  • यदि कोई राज्य यह मानता है कि वह किसी निरपेक्ष नैतिक सत्य (Absolute Moral Truth) या धर्मयुद्ध (Crusade) के लिए लड़ रहा है, तो विरोधी के साथ कूटनीतिक समझौता (Diplomatic Compromise) करना असंभव हो जाता है।
  • ऐसी स्थिति में प्रतिद्वंद्वी केवल एक रणनीतिक प्रतिस्पर्धी (Strategic Competitor) न रहकर एक ‘दुष्ट’ या वैचारिक शत्रु (Ideological Enemy) बन जाता है, जिससे कूटनीति (Diplomacy) और वार्ता (Negotiation) विफल हो जाती है।
  • Morgenthau इसलिए राजनीतिक विवेक (Political Prudence) पर बल देते हैं, जहाँ राजनेता (Statesman) को नैतिक सिद्धांतों से अधिक व्यावहारिक परिणामों (Practical Consequences) और शक्ति संतुलन (Balance of Power) का ध्यान रखना चाहिए।

Morgenthau के राजनीतिक यथार्थवाद के छह सिद्धांत (Six Principles of Political Realism)

  1. मानव स्वभाव पर आधारित वस्तुनिष्ठ नियम (Objective Laws Rooted in Human Nature): राजनीति उन वस्तुनिष्ठ नियमों द्वारा शासित होती है जिनकी जड़ें मानव स्वभाव में हैं।
  2. शक्ति के रूप में परिभाषित राष्ट्रीय हित (National Interest Defined in Terms of Power): अंतरराष्ट्रीय राजनीति को समझने का मुख्य मार्गदर्शक सिद्धांत ‘शक्ति के रूप में परिभाषित राष्ट्रीय हित’ है।
  3. राष्ट्रीय हित का गतिशील स्वरूप (Dynamic Nature of National Interest): राष्ट्रीय हित कोई स्थिर (Fixed) अवधारणा नहीं है; यह समय, स्थान और संदर्भ के अनुसार बदलती रहती है।
  4. अमूर्त नैतिकता की अस्वीकृति (Tension between Moral Significance and Political Action): राजनीतिक कार्यों का नैतिक महत्व होता है, लेकिन सार्वभौमिक नैतिक सिद्धांतों (Universal Moral Principles) को राज्यों के कार्यों पर सीधे लागू नहीं किया जा सकता; उन्हें विवेक (Prudence) के माध्यम से छानना पड़ता है
  5. राष्ट्र विशेष की आकांक्षाओं और सार्वभौमिक नैतिकता में भेद (Refusal to Identify Moral Aspirations of a Nation with Universal Laws): कोई भी राष्ट्र अपने विशिष्ट नैतिक मूल्यों को संपूर्ण विश्व का सार्वभौमिक सत्य (Universal Moral Truth) घोषित नहीं कर सकता।
  6. राजनीतिक क्षेत्र की स्वायत्तता (Autonomy of the Political Sphere): राजनीतिक यथार्थवाद राजनीतिक क्षेत्र को अर्थशास्त्र (Economics), कानून (Law) या अमूर्त नैतिकता (Morality) से स्वतंत्र और स्वायत्त मानता है।

शक्ति और नैतिकता (Power and Morality)

  • Morgenthau अमूर्त नैतिकतावाद (Abstract Moralism) की आलोचना करते हैं। उनका मानना है कि किसी विदेश नीति को केवल नेक इरादों (Good Intentions) के आधार पर सही नहीं ठहराया जा सकता; उसके राजनीतिक परिणाम (Political Consequences) देखे जाने चाहिए।
  • उनके अनुसार राजनेता का सर्वोच्च गुण विवेक (Prudence) है अर्थात संभावित परिणामों, उपलब्ध शक्ति और राष्ट्रीय हित के बीच संतुलन साधना।

शक्ति संतुलन (Balance of Power)

  • यदि अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था में किसी एक राज्य के पास अत्यधिक शक्ति केंद्रित (Power Hegemony) हो जाए, तो अन्य राज्य गठबंधन (Alliances), कूटनीति और सैन्य क्षमता द्वारा उसका संतुलन (Balancing) करते हैं।
  • शक्ति संतुलन (Balance of Power) केवल वर्चस्व का माध्यम नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्थिरता (International Stability) और शांति बनाए रखने का अनिवार्य साधन है।

Morgenthau के सिद्धांत की प्रमुख आलोचनाएँ (Major Critiques)

केनेथ वाल्ट्ज

  • मॉर्गेंथाऊ की क्लासिकल रियलिज्म की सबसे प्रभावशाली आलोचनाओं में से एक केनेथ वाल्ट्ज के स्ट्रक्चरल रियलिज्म से आती है।
  • मॉर्गेंथाऊ इंटरनेशनल पॉलिटिक्स में पावर स्ट्रगल को काफी हद तक ह्यूमन नेचर और पॉलिटिकल बिहेवियर से जोड़ते हैं। वाल्ट्ज के अनुसार इंटरनेशनल कॉन्फ्लिक्ट को केवल ह्यूमन नेचर से समझाना काफी नहीं है।
  • वाल्ट्ज ने इंटरनेशनल सिस्टम की अराजक संरचना और राज्यों की क्षमताओं के डिस्ट्रीब्यूशन को ज्यादा महत्व दिया।
  • इसलिए वाल्ट्ज का स्ट्रक्चरल रियलिज्म यह बताता है कि राज्यों का व्यवहार केवल उनके लीडर्स की निर्भरता या ह्यूमन नेचर से नहीं बल्कि उस इंटरनेशनल स्ट्रक्चर से भी प्रभावित होता है जिसमें वे मौजूद हैं।
  • इस दृष्टि से मॉर्गेंथाऊ का अप्रोच ज्यादा एजेंसी और ह्यूमन नेचर ओरिएंटेड माना जाता है, जबकि वाल्ट्ज का अप्रोच ज्यादा सिस्टेमिक और स्ट्रक्चरल है।

लिबरल क्रिटिक: रॉबर्ट कीहेन

  • लिबरल इंस्टीट्यूशनलिस्ट, रॉबर्ट कीहेन, मॉर्गेंथाऊ के पावर-सेंट्रिक अप्रोच की आलोचना करते हैं।
  • उनके अनुसार स्टेट्स केवल पावर कॉम्पिटिशन में जुड़े एक्टर नहीं हैं। वे इंटरनेशनल इंस्टीट्यूशन के ज़रिए कोऑपरेशन भी कर सकते हैं।
  • इंटरनेशनल इंस्टीट्यूशन जानकारी उपलब्ध करा सकते हैं, अनिश्चितता कम कर सकते हैं, ट्रांज़ैक्शन कॉस्ट कम हो सकती हैं और स्टेट्स को बार-बार होने वाले इंटरैक्शन के ज़रिए कोऑपरेशन के लिए प्रोत्साहित कर सकते हैं।
  • इसलिए मॉर्गेंथाऊ का यह मानना ​​कि इंटरनेशनल पॉलिटिक्स को मुख्यतः पावर स्ट्रगल के ज़रिए से समझा जाना चाहिए, लिबरल अप्रोच से अधूरा माना जा सकता है।

कंस्ट्रक्टिविस्ट क्रिटिक: अलेक्जेंडर वेंड्ट

  • कंस्ट्रक्टिविस्ट विचारक अलेक्जेंडर वेंड्ट मॉर्गेंथाऊ के मटेरियल पावर-ओरिएंटेड अप्रोच की एक अलग तरह से आलोचना करते हैं।
  • कंस्ट्रक्टिविज़्म के अनुसार इंटरनेशनल पॉलिटिक्स केवल मटेरियल क्षमताओं से निर्धारित नहीं होती। आइडिया, पहचान, मानदंड और साझा अर्थ भी स्टेट्स के हितों को आकार देते हैं।
  • इस दृष्टिकोण से विचारधारा को केवल राष्ट्रीय हित का मुखौटा पर्याप्त नहीं है। कई परिस्थितियों में विचार और पहचान स्वयं यह निर्धारित कर सकते हैं कि राज्य अपने राष्ट्रीय हित को कैसे समझेंगे।
  • उदाहरण के लिए दो राज्यों के पास समान सैन्य क्षमता होने के बावजूद यदि उनकी पहचान और आपसी धारणाएं अलग हैं, तो उनके बीच संघर्ष या सहयोग की संभावनाएं अलग हो सकती हैं।

मार्क्सवादी आलोचना

  • मार्क्सवादी और आलोचनात्मक दृष्टिकोण मॉर्गेंथाऊ की राज्य केंद्रित शक्ति राजनीति की आलोचना करते हैं।
  • उनके अनुसार अंतरराष्ट्रीय राजनीति में केवल राज्यों के राष्ट्रीय हितों को केंद्र में रखने से पूंजीवाद, वर्ग संबंध, आर्थिक शोषण और वैश्विक असमानता जैसे महत्वपूर्ण कारक पर्याप्त रूप से सामने नहीं आते।
  • मार्क्सवादी दृष्टिकोण यह सवाल भी उठाता है कि जिस राष्ट्रीय हित की बात राज्य करता है, वह वास्तव में समाज के किन निकायों के हितों को दर्शाता है।
  • इस प्रकार मॉर्गेंथाऊ का विश्लेषण राज्य को प्राथमिक इकाई मानता है, जबकि आलोचनात्मक दृष्टिकोण राज्य के भीतर मौजूद आर्थिक और सामाजिक शक्ति संबंधों को अधिक महत्व देते हैं।

फेमिनिस्ट क्रिटिक

  • फेमिनिस्ट इंटरनेशनल रिलेशंस स्कॉलर्स भी मॉर्गेंथाऊ के क्लासिकल रियलिज्म की आलोचना करते हैं।
  • उनके अनुसार ट्रेडिशनल रियलिज्म सिक्योरिटी को मुख्यतः स्टेट सर्वाइवल, मिलिट्री पावर और स्ट्रेटेजिक कॉम्पिटिशन के संदर्भ में देखता है। इससे जेंडर रिलेशंस, रोज़मर्रा की इनसिक्योरिटी, सोशल इनइक्वालिटी और ह्यूमन सिक्योरिटी के सवाल पीछे छूट सकते हैं।
  • फेमिनिस्ट स्कॉलर्स सिक्योरिटी को सिर्फ स्टेट की सिक्योरिटी नहीं बल्कि इंडिविजुअल्स और कम्युनिटीज की सिक्योरिटी के रूप में भी समझने का आग्रह करते हैं।
  • इस अप्रोच से मॉर्गेंथाऊ का फ्रेमवर्क इंटरनेशनल पॉलिटिक्स के कुछ महत्वपूर्ण डाइमेंशन्स को काफी इंपॉर्टेंस नहीं देता।

समकालीन प्रासंगिकता (Contemporary Relevance)

  • महाशक्ति प्रतिस्पर्धा (Great Power Competition): अमेरिका और चीन के बीच तकनीकी, आर्थिक और सैन्य प्रभाव को लेकर जारी द्वंद्व Morgenthau के शक्ति राजनीति (Power Politics) मॉडल को पुष्ट करता है।
  • भू-राजनीतिक संघर्ष (Geopolitical Conflicts): रूस-यूक्रेन युद्ध और पश्चिम एशिया के संकट में सुरक्षा दुविधा (Security Dilemma) और राष्ट्रीय हितों का टकराव स्पष्ट रूप से दिखता है।
  • इंडो-पैसिफिक संतुलन (Indo-Pacific Balance of Power): क्वाड (Quad) और अन्य रणनीतिक साझेदारियां Morgenthau के शक्ति संतुलन सिद्धांत का आधुनिक उदाहरण हैं।

निष्कर्ष (Conclusion)

Hans J. Morgenthau का शास्त्रीय यथार्थवाद (Classical Realism) अंतरराष्ट्रीय संबंधों के अध्ययन में शक्ति (Power) और राष्ट्रीय हित (National Interest) को केंद्रीय स्थान देता है। उनके अनुसार विचारधाराएं प्रायः शक्ति के वास्तविक लक्ष्यों पर एक आवरण (Mask) का कार्य करती हैं। यद्यपि नव-यथार्थवाद (Neorealism), नव-उदारवाद (Neoliberalism), रचनावाद (Constructivism) और नारीवाद (Feminism) ने उनकी सीमाओं को रेखांकित किया है, फिर भी अंतरराष्ट्रीय राजनीति में राज्यों के रणनीतिक व्यवहार और कूटनीतिक यथार्थ को समझने के लिए उनका विश्लेषणात्मक ढांचा आज भी उतना ही प्रासंगिक है।

Related MCQs

  1. फेमिनिस्ट दृष्टिकोण के अनुसार पारंपरिक यथार्थवाद की सुरक्षा अवधारणा की प्रमुख सीमा क्या है?
  2. यह आर्थिक शक्ति को अधिक महत्व देता है
    B. यह सुरक्षा को मुख्यतः राज्य और सैन्य शक्ति से जोड़ता है
    C. यह अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं को अत्यधिक महत्व देता है
    D. यह मानव सुरक्षा को केंद्र में रखता है

उत्तर: B

  1. फेमिनिस्ट IR के अनुसार सुरक्षा का दायरा किस तक विस्तारित किया जाना चाहिए?
  2. केवल राज्य तक
    B. केवल सेना तक
    C. व्यक्तियों और समुदायों तक
    D. केवल सरकार तक

उत्तर: C

  1. निम्नलिखित में से कौन-सा मुद्दा Feminist IR, Morgenthau के Classical Realism की आलोचना करते समय विशेष रूप से सामने लाता है?
  2. जेंडर संबंध और सामाजिक असमानता
    B. केवल सैन्य गठबंधन
    C. केवल परमाणु शक्ति
    D. केवल शक्ति संतुलन

उत्तर: A

  1. कथन (A): फेमिनिस्ट विद्वान मॉर्गेंथाऊ के राज्य-केंद्रित दृष्टिकोण की आलोचना करते हैं।

कारण (R): उनके अनुसार अंतरराष्ट्रीय राजनीति में व्यक्तियों, समुदायों और रोज़मर्रा की असुरक्षाओं को भी समझना आवश्यक है।

  1. A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है।
    B. A और R दोनों सही हैं, लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं है।
    C. A सही है, लेकिन R गलत है।
    D. A गलत है, लेकिन R सही है।

उत्तर: A

  1. निम्नलिखित में से कौन-सा विकल्प Feminist Critique और Morgenthau के Realism के बीच सही अंतर दर्शाता है?
  2. Morgenthau – Human Security; Feminism – Military Security
    B. Morgenthau – State Survival; Feminism – Individual & Human Security
    C. Morgenthau – Gender Equality; Feminism – Power Politics
    D. Morgenthau – Social Inequality; Feminism – State Survival

उत्तर: B

 

 

 

 

 


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