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BRICS+ और भारत: सहयोग के माध्यम से बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था का निर्माण

BRICS+ and India: Building a Multipolar World Order through Cooperation

BRIC की अवधारणा गोल्डमैन सैक्स के अर्थशास्त्री जिम ओ’नील ने 2001 में प्रस्तुत की थी। ब्राजील, रूस, भारत और चीन ने 2006 में उच्च स्तरीय मंत्रिस्तरीय परामर्श शुरू किया और 2009 में अपना पहला शिखर सम्मेलन आयोजित किया। 2010 में दक्षिण अफ्रीका के शामिल होने के बाद यह समूह BRICS के रूप में विकसित हुआ।

समय के साथ BRICS केवल आर्थिक समूह नहीं रहा, बल्कि उभरती बाजार अर्थव्यवस्थाओं और विकासशील देशों के बीच व्यापक सहयोग के मंच के रूप में विकसित हुआ।

इसका विस्तार अधिक प्रतिनिधिक और बहुध्रुवीय वैश्विक व्यवस्था की बढ़ती मांग को दर्शाता है।

BRICS+: बढ़ता वैश्विक महत्व

  • BRICS+ में वर्तमान में 11 सदस्य हैं: ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका, मिस्र, इथियोपिया, इंडोनेशिया, ईरान, संयुक्त अरब अमीरात और सऊदी अरब।
  • इसके अतिरिक्त BRICS के साथ 10 साझेदार देश भी जुड़े हुए हैं।
  • इसका बढ़ता महत्व इसकी जनसंख्या और आर्थिक शक्ति से जुड़ा है।
  • BRICS देश विश्व की लगभग 45 प्रतिशत जनसंख्या का प्रतिनिधित्व करते हैं, जबकि BRICS+ के व्यापक ढाँचे में यह हिस्सा लगभग 55 प्रतिशत तक पहुँचता है।
  • क्रय शक्ति समता यानी PPP के आधार पर BRICS+ अर्थव्यवस्थाएँ वैश्विक GDP का लगभग 35 से 45 प्रतिशत हिस्सा रखती हैं।
  • इनकी सामूहिक नाममात्र GDP 30 ट्रिलियन डॉलर से अधिक है।
  • आने वाले वर्षों में इस समूह की आर्थिक वृद्धि दर G7 की तुलना में अधिक रहने की संभावना है।
  • अर्जेंटीना, अल्जीरिया और तुर्किये जैसे देशों ने भी BRICS में शामिल होने में रुचि दिखाई है।
  • इस प्रकार BRICS+ दक्षिण-दक्षिण सहयोग, आर्थिक समन्वय और वैश्विक शासन संस्थाओं में सुधार के लिए एक महत्वपूर्ण मंच के रूप में उभर रहा है।
  • इसकी वास्तविक शक्ति केवल आर्थिक आकार में नहीं है, बल्कि उन देशों को एक मंच प्रदान करने में है जो द्वितीय विश्व युद्ध के बाद निर्मित वैश्विक संस्थाओं में अधिक प्रतिनिधित्व की मांग कर रहे हैं।

भारत की 2026 BRICS अध्यक्षता: चार प्रमुख प्राथमिकताएँ

नई दिल्ली में आयोजित होने वाले 2026 BRICS शिखर सम्मेलन के माध्यम से भारत को समूह के भविष्य के एजेंडे को आकार देने का महत्वपूर्ण अवसर मिलेगा।

भारत की प्राथमिकताएँ चार प्रमुख विषयों पर आधारित हैं:

  1. लचीलापन या Resilience: इसका उद्देश्य वैश्विक व्यवधानों से निपटने के लिए आपूर्ति श्रृंखलाओं, ऊर्जा सुरक्षा, खाद्य सुरक्षा और संस्थागत क्षमता को मजबूत करना है।
  2. नवाचार या Innovation: भारत तकनीकी सहयोग, डिजिटल परिवर्तन, उभरती प्रौद्योगिकियों और समावेशी नवाचार को बढ़ावा देना चाहता है।
  3. सहयोग या Cooperation: इसका उद्देश्य विकासशील देशों के बीच आर्थिक, वित्तीय, राजनीतिक और विकास संबंधी चुनौतियों पर समन्वय को मजबूत करना है।
  4. सततता या Sustainability: जलवायु परिवर्तन, सतत विकास, हरित परिवर्तन और संसाधन सुरक्षा से संबंधित चुनौतियों का समाधान करना इस प्राथमिकता का प्रमुख उद्देश्य है।

भारत का दृष्टिकोण यह सुनिश्चित करना है कि सतत विकास और हरित परिवर्तन लोगों की आवश्यकताओं तथा विकासशील देशों की विकास संबंधी जरूरतों के प्रति संवेदनशील रहें।

इन प्राथमिकताओं को BRICS के तीन व्यापक स्तंभों के माध्यम से आगे बढ़ाया जा सकता है:

  1. राजनीतिक और सुरक्षा सहयोग
  2. आर्थिक और वित्तीय साझेदारी
  3. सांस्कृतिक तथा लोगों के बीच संपर्क

बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था के निर्माण में BRICS+ की भूमिका

  • BRICS+ का विस्तार विश्व राजनीति में शक्ति के बदलते वितरण को दर्शाता है।
  • पारंपरिक पश्चिमी संस्थाओं के प्रभुत्व वाले वैश्विक शासन ढाँचे के विकल्प के रूप में BRICS+ विकासशील और उभरती अर्थव्यवस्थाओं को अपनी आवाज मजबूत करने का अवसर प्रदान करता है।
  • यह समूह किसी एक देश के प्रभुत्व वाली विश्व व्यवस्था के बजाय अधिक बहुध्रुवीय और बहुपक्षीय व्यवस्था की वकालत करता है।
  • भारत के लिए BRICS+ रणनीतिक स्वायत्तता बनाए रखते हुए ग्लोबल साउथ की चिंताओं को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर प्रस्तुत करने का अवसर प्रदान करता है।

भारत के लिए अवसर

  • भारत अपनी 2026 BRICS अध्यक्षता का उपयोग कई क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के लिए कर सकता है।
  • इनमें डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, वित्तीय सहयोग, स्वास्थ्य, ऊर्जा सुरक्षा, खाद्य सुरक्षा, जलवायु परिवर्तन और सतत विकास प्रमुख हैं।
  • भारत विशेष रूप से विकासशील देशों के लिए ऐसी प्रौद्योगिकी और विकास मॉडल को बढ़ावा दे सकता है जो सुलभ, समावेशी और लोगों की आवश्यकताओं पर केंद्रित हों।
  • BRICS+ के माध्यम से भारत ग्लोबल साउथ और विकसित देशों के बीच एक महत्वपूर्ण सेतु की भूमिका भी निभा सकता है।

चुनौतियाँ

  • BRICS+ की सबसे बड़ी चुनौती इसके सदस्यों की राजनीतिक, आर्थिक और सामरिक विविधता है।
  • भारत और चीन के बीच सीमा विवाद तथा विभिन्न सदस्यों के बीच अलग-अलग राष्ट्रीय हित निर्णय लेने की प्रक्रिया को जटिल बनाते हैं।
  • समूह के विस्तार से प्रतिनिधित्व बढ़ता है, लेकिन आम सहमति बनाना भी अधिक कठिन हो सकता है।
  • इसलिए भारत को अपनी अध्यक्षता के दौरान समावेशी, व्यावहारिक और सहमति आधारित दृष्टिकोण अपनाना होगा।

निष्कर्ष

BRICS+ आज उभरती हुई बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण मंच बन रहा है।

भारत की 2026 अध्यक्षता उसे समूह के भविष्य को अधिक प्रभावी ढंग से आकार देने का अवसर प्रदान करती है।

लचीलापन, नवाचार, सहयोग और सततता की प्राथमिकताओं के माध्यम से भारत BRICS+ को केवल एक आर्थिक समूह से आगे बढ़ाकर वैश्विक दक्षिण के व्यापक सहयोग के प्रभावी मंच के रूप में विकसित कर सकता है।

भारत की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि वह विभिन्न सदस्य देशों के हितों के बीच संतुलन बनाते हुए सहयोग को मजबूत करे और अधिक न्यायपूर्ण, प्रतिनिधिक तथा बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था के निर्माण में योगदान दे।

MCQ

प्रश्न 1. BRIC की अवधारणा किसने और किस वर्ष प्रस्तुत की थी?

  1. जोसेफ नाए, 1991
    B. जिम ओ’नील, 2001
    C. सैमुअल हंटिंगटन, 1996
    D. हेनरी किसिंजर, 2009

उत्तर: B. जिम नील, 2001

प्रश्न 2. निम्नलिखित में से कौनसा BRICS+ में भारत की 2026 अध्यक्षता की चार प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल नहीं है?

  1. लचीलापन
    B. नवाचार
    C. सहयोग
    D. सैन्य विस्तार

उत्तर: D. सैन्य विस्तार

प्रश्न 3. BRICS+ की प्रमुख भूमिका क्या है?

  1. केवल सैन्य गठबंधन के रूप में कार्य करना
    B. एकध्रुवीय विश्व व्यवस्था को मजबूत करना
    C. दक्षिण-दक्षिण सहयोग और बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था को बढ़ावा देना
    D. केवल विकसित देशों के आर्थिक हितों की रक्षा करना

उत्तर: C. दक्षिणदक्षिण सहयोग और बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था को बढ़ावा देना

प्रश्न 4. भारत की 2026 BRICS अध्यक्षता के अंतर्गत नवाचार प्राथमिकता का प्रमुख उद्देश्य क्या है?

  1. केवल पारंपरिक उद्योगों को बढ़ावा देना
    B. तकनीकी सहयोग, डिजिटल परिवर्तन और उभरती प्रौद्योगिकियों को बढ़ावा देना
    C. सैन्य प्रौद्योगिकी का निर्यात बढ़ाना
    D. विदेशी प्रौद्योगिकी पर निर्भरता बढ़ाना

उत्तर: B. तकनीकी सहयोग, डिजिटल परिवर्तन और उभरती प्रौद्योगिकियों को बढ़ावा देना

प्रश्न 5. BRICS+ के सामने प्रमुख चुनौती क्या है?

  1. सभी सदस्य देशों की समान विदेश नीति
    B. सदस्यों के बीच राजनीतिक, आर्थिक और सामरिक विविधता
    C. वैश्विक अर्थव्यवस्था में अत्यधिक एकरूपता
    D. सदस्य देशों के बीच पूर्ण राजनीतिक सहमति

उत्तर: B. सदस्यों के बीच राजनीतिक, आर्थिक और सामरिक विविधता

 


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